आठ घंटे अनशन पर मिला न्याय, गर्भ में पल रहे बच्चे की गलत रिपोर्ट पर तीन डायग्नोस्टिक सेंटर सील
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दंपत्ति ने गर्भ में पल रहे बच्चे की गलत रिपोर्ट देने के मामले में डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया लेकिन कार्रवाई ना होने पर धरने पर बैठ गये. जिसके बाद अब तीन डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर लाइसेंस को रद्द कर दिया है.

गोरखपुर: बच्चे के दिव्यांग पैदा होने पर एक दंपत्ति कड़ाके की ठंड में डायग्नोस्टिक सेंटर को सील करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गया. जिसके बाद अब प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर लाइसेंस को रद्द कर दिया है.
दरअसल, दंपत्ति ने गर्भ में पल रहे बच्चे की गलत रिपोर्ट देने पर डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. लेकिन किसी तरह की कार्रवाई ना होने पर दंपत्ति धरने पर बैठ गया. बताया जा रहा है कि दंपत्ति सहजनवां के देईपार गांव का है जहां अभिषेक कुमार पाण्डेय की पत्नी अनुराधा पाण्डेय ने 15 अगस्त को जिला महिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया. इसके पूर्व उन्होंने गर्भावस्था की शुरुआत से ही कई निजी चिकित्सकों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों में समय-समय पर जांच कराई. उन्होंने बताया कि बच्चे का विकास ठीक ढंग से होने की जानकारी को लेकर उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर लेवल-2 की जांच भी कराई. रिपोर्ट देखेने के बाद निजी चिकित्सकों ने पेट में पल रहे बच्चें को पूरी तरह से स्वस्थ बताते हुए इलाज किया गया.
जिला महिला चिकित्सालय में जन्म के बाद चिकित्सकों ने बताया कि बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग है. उन्होंने बताया कि जन्म के बाद पता चला कि उसका एक हाथ भी विकसित नहीं हो पाया है. इसके साथ ही उनके ललाट पर भी ढाल और उभार है. नवजात के जन्म के बाद नवदम्पति शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो गए. थक हारकर नवदम्पति ने जिलाधिकारी, सीएमओ और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से निजी चिकित्सकों की शिकायत की और जांच कर कार्रवाई की मांग की.

इस मामले में गोरखपुर के सीएमओ ने एक जांच कमिटी बनाई. डीएम के आदेश के बाद स्पर्श डायग्नोस्टिक सेंटर, सहजनवा के न्यू आदित्य अल्ट्रासाउंड सेंटर और प्रज्ञा हॉस्पिटल के एक डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया गया है. सहजनवा के देईपार के अभिषेक पांडेय और उनकी पत्नी अनुराधा ने चार डॉक्टरों अरुणा छापड़िया, डॉक्टर अंजू मिश्रा, डॉक्टर नेहल और डॉक्टर काजल पर जन्म से पहले बच्चे की गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगाया था.
दंपत्ति का आरोप है कि गर्भधारण के बाद बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के संबंध में जनवरी 2020 से जुलाई तक डॉक्टर्स की सलाह पर निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराया गया. रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बच्चे के सभी अंग विकसित होने के साथ ही स्वस्थ बताया. 15 अगस्त को जब बच्चा पैदा हुआ तो जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसे दिव्यांग बताया. बच्चे का बायां हाथ नहीं है और सिर असामान्य रूप से विकसित है. इसके बाद दंपत्ति ने डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. डीएम दफ्तर पर ही नवजात बच्चे के साथ दंपती भूख हड़ताल पर बैठ गए. गुरुवार को डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कराने के लिए जॉइंट मजिस्ट्रेट पहुंचे. इसके साथ ही डीएम ने तीनों सेंटरों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए हैं.
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