महिला आरक्षण पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम! धामी सरकार का विशेष सत्र, देहरादून में मशाल जुलूस
Uttarakhand Politics: धामी सरकार ने 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का फैसला किया है. विशेष सत्र समाप्त होने के बाद देहरादून में एक बड़ा मशाल जुलूस भी निकाला जाएगा.

महिला आरक्षण को लोकसभा में पारित न होने देने के मुद्दे पर देशभर में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. बीजेपी शासित राज्यों में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला जा रहा है. उत्तराखंड में भी धामी सरकार ने 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का फैसला किया है. इसके साथ ही विशेष सत्र समाप्त होने के बाद देहरादून में एक बड़ा मशाल जुलूस भी निकाला जाएगा जिसमें खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल होंगे.
बीजेपी की ओर से निकाला जाने वाला यह मशाल जुलूस देहरादून के गांधी पार्क से शुरू होकर ऐतिहासिक घंटाघर तक जाएगा. जुलूस में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ बीजेपी संगठन की बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगी. पार्टी का साफ संदेश है कि जो दल संसद में महिलाओं को उनका हक दिलाने वाले इस बिल को रोक रहे हैं, उनके खिलाफ जनता के बीच जाकर आवाज बुलंद की जाएगी.
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने साधा विपक्ष पर निशाना
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि विपक्ष का असली चेहरा अब सबके सामने आ चुका है. जो दल वर्षों से महिला सशक्तिकरण की दुहाई देते नहीं थकते, वही दल जब मौका आया तो महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस ऐतिहासिक बिल को पारित नहीं होने दे रहे. उन्होंने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि महिलाएं आगे बढ़ें, नेतृत्व करें और अपने अधिकारों के लिए खड़ी हों, यही सोच उनके इस कदम में साफ झलकती है.
33% आरक्षण पर गरमाई सियासत
गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन बिल में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है. बीजेपी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है, जबकि विपक्षी दलों ने इस बिल पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए इसे रोकने की कोशिश की है. इसी को लेकर अब बीजेपी शासित राज्यों में एक के बाद एक विशेष सत्र बुलाए जा रहे हैं और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाए जा रहे हैं.
उत्तराखंड में 28 अप्रैल का यह विशेष सत्र और उसके बाद निकलने वाला मशाल जुलूस, दोनों मिलकर बीजेपी के इस अभियान को धार देने का काम करेंगे. देखना यह होगा कि विपक्ष इस राजनीतिक दबाव का जवाब किस तरह देता है.























