सपा विधायक का BJP पर वार, कहा- महिलाओं पर लाठीचार्ज 'जलियांवाला' जैसा
UP Politics: विधायक रागिनी सोनकर ने CJP के प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की तुलना 'जलियांवाला बाग' कांड से की और महिलाओं के सम्मान पर सवाल उठाए.

समाजवादी पार्टी (SP) की विधायक रागिनी सोनकर ने हाल ही में CJP (सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए इस पूरी घटना को 'जलियांवाला बाग' कांड के समान करार दिया है.
विधायक रागिनी सोनकर ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा, "सरकारें आती हैं और चली जाती हैं. विधायक, सांसद और मंत्री भी आते-जाते रहते हैं, लेकिन देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था हमेशा मजबूत रहनी चाहिए." उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संविधान ने देश के हर नागरिक को स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार दिया है, जिसका हनन नहीं किया जा सकता.
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VIDEO | Lucknow: Samajwadi Party MLA Ragini Sonkar says, “Governments come and go. MLAs, MPs and ministers also come and go, but the country's democratic system must remain strong. Every citizen has the right to the freedoms and protections guaranteed by the Constitution. The… pic.twitter.com/8P4PrlcDAe
— Press Trust of India (@PTI_News) August 2, 2026
'जलियांवाला बाग कांड से कम नहीं थी यह घटना'
CJP के आंदोलन को एक शांतिपूर्ण 'सत्याग्रह' बताते हुए सपा विधायक ने पुलिस की बर्बरता पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह जलियांवाला बाग की घटना से किसी भी तरह कम नहीं था."
महिलाओं पर लाठीचार्ज से खुली 'सम्मान' की पोल
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं पर हुए बल प्रयोग को लेकर सरकार को घेरते हुए रागिनी सोनकर ने कहा, "आंदोलन के दौरान महिलाओं पर लाठियां भांजी गईं. यह साफ तौर पर दर्शाता है कि आपके (सरकार के) मन में महिलाओं के प्रति कितना 'सम्मान' है."
विपक्ष का प्रदर्शन था, तो बातचीत क्यों नहीं की?
सरकार द्वारा इस पूरे आंदोलन को 'विपक्ष द्वारा प्रायोजित' बताए जाने के नैरेटिव पर भी रागिनी सोनकर ने पलटवार किया. उन्होंने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा, "बाद में सरकार ने इसे विपक्ष के नेतृत्व वाला प्रदर्शन बताने की कोशिश की. लेकिन अगर यह विपक्ष का ही प्रदर्शन था, तो जब वे लोग अपनी मांगों को लेकर वहां धरने पर बैठे थे, तब आपने (सरकार ने) उनके साथ कोई बातचीत (Dialogue) क्यों नहीं की?"
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