सोनभद्र: गुरमा जेल में NDPS एक्ट के बंदी की मौत, खून की उल्टी के बाद किया गया था भर्ती
Sonbhadra Jail News: सोनभद्र जिले के गुरमा जेल में राधेश्याम यादव नामक विचाराधीन कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई. वह नशे का आदी था और खून की उल्टी होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र स्थित जिला कारागार गुरमा में गुरुवार (5 फरवरी) को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां निरुद्ध एक 26 वर्षीय विचाराधीन बंदी की इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक की पहचान राधेश्याम यादव (निवासी उरमौरा, कोतवाली रॉबर्ट्सगंज) के रूप में हुई है. बंदी की मौत के बाद जेल परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है और साथी बंदियों में शोक व भय का माहौल है. वहीं, मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच मौत के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
नशे का आदी था बंदी
खून की उल्टी और एक घंटे में मौत कारागार अधीक्षक अरुण कुमार मिश्र के अनुसार, राधेश्याम यादव नशे का आदी था. बुधवार की देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे तेज खांसी के साथ कफ में खून आने लगा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया. हालांकि, इलाज शुरू होने के मात्र एक घंटे के भीतर, गुरुवार तड़के करीब पौने तीन बजे उसने दम तोड़ दिया. जेल प्रशासन ने मौत के बाद विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
मां के साथ पुलिस ने किया था गिरफ्तार
राधेश्याम यादव का नाम सुर्खियों में तब आया था, जब 4 जनवरी 2026 को रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था. पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में पुलिस ने राधेश्याम और उसकी मां पानपत्ती देवी को उरमौरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया था. इनके पास से 20.70 ग्राम नाजायज हेरोइन बरामद हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब तीन लाख रुपये आंकी गई थी. इस मामले में पुलिस ने धारा 8/21/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर 5 जनवरी 2026 को उसे जेल भेजा था.
लंबा आपराधिक इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राधेश्याम यादव एक आदतन अपराधी था. उस पर एनडीपीएस, आर्म्स एक्ट और गुंडा एक्ट समेत एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज थे. विडंबना यह है कि मृतक का भाई सोनू यादव भी इसी जेल में बंद है, जबकि उसकी मां पानपत्ती देवी की रिहाई घटना से महज तीन दिन पहले ही हुई थी.
युवक की मौत ने जेल की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि जेल के अंदर उसकी तबीयत अचानक इतनी कैसे बिगड़ी कि उसे बचाया न जा सका? फिलहाल, जेल प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी.

















