शामली में बारिश ने खोली नगर पालिका के दावों की पोल, सैकड़ों घरों में भरा बरसात का पानी
UP News: शामली में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने नगर पालिका के दावों की पोल खोल दी है. बारिश के कारण दो दर्जन से अधिक मोहल्लों के सैकड़े घरों में पानी भर गया.

उत्तर प्रदेश के शामली शहर में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया. सोमवार 11 अगस्त को सुबह 5 बजे से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला दोपहर तक रुकने का नाम नहीं ले रहा था. बारिश के कारण दो दर्जन से अधिक मोहल्लों और सैकड़ों घरों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया. घरों का सामान पानी में डूबकर खराब हो गया, तो वहीं बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएँ भी इस जलभराव में फंस गए.
दरअसल, जनपद शामली में सुबह के वक्त जब बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह दिन उनके लिए इस तरह की मुश्किलें लेकर आएगा. शामली की रॉक गोल्ड एकेडमी की वैन, जिसमें बच्चे और स्कूल की मैडम मौजूद थीं, तीन से चार फीट पानी में फँस गई.
यही नहीं, जैन कॉलेज बनत की वैन भी बच्चों और शिक्षकों समेत एक घंटे से ज्यादा समय तक पानी में फंसी रही. वैन को दूसरी स्कूल गाड़ी की मदद से निकालने की कोशिश हुई, लेकिन पानी का दबाव इतना था कि रस्सी तक टूट गई और गाड़ी वहीं अटक गई. आखिरकार, बच्चों को स्कूल पहुंचाने के बजाय, उन्हें वापस घर लौटाना पड़ा.
बाजार और व्यापार पर असर
शामली के नेहरू मार्केट और कैराना रोड जैसे बड़े बाजार भी पानी में डूब गए. दुकानों में घुसा पानी लाखों का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का नुकसान कर गया. व्यापारी अपने गीले पड़े माल को बचाने की जद्दोजहद करते नजर आए. कई दुकानदारों का कहना है कि बरसात से बचाव के लिए उन्होंने अपने स्तर पर तैयारी की थी, लेकिन नालियों की सफाई और पानी की निकासी न होने से सारी मेहनत बेकार चली गई.
सड़कों पर भरा लबालब पानी
शहर की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक, हर जगह पानी ही पानी था. कोई भी ऐसा इलाका नजर नहीं आया, जहाँ तीन से चार फीट तक पानी जमा न हो. लोग मजबूरी में गंदे पानी में घुसकर अपने जरूरी काम निपटाने को मजबूर हुए. वाहन चालकों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ी, कई टू-व्हीलर और कारें पानी में बंद हो गईं.
शामली में हुई मूसलाधार बारिश ने नगर पालिका के साफ-सफाई और नालों की समय पर सफाई के दावों के पोल खोल दिये. करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नालों की समय पर सफाई होती और जल निकासी की उचित व्यवस्था होती, तो आज इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.
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Source: IOCL























