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कब्ज की समस्या कब बन जाती है कैंसर, कब हो जाना चाहिए सावधान?

अक्सर लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि कहीं उनकी लंबे समय से चली आ रही कब्ज आंत या कोलन कैंसर का संकेत तो नहीं, ज्यादातर मामलों में कब्ज का कारण कैंसर नहीं होता है.

आज की तेज रफ्तार जिंदगी, गलत खान-पान, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कब्ज की समस्या बहुत आम हो गई है. दुनिया भर में लाखों लोग रोजाना इस परेशानी से जूझ रहे हैं. कभी-कभार कब्ज होना आम बात है और आमतौर पर इसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन जब यही समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह चिंता का कारण बन सकती है. अक्सर लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि कहीं उनकी लंबे समय से चली आ रही कब्ज आंत या कोलन कैंसर का संकेत तो नहीं, ज्यादातर मामलों में कब्ज का कारण कैंसर नहीं होता, बल्कि यह हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान से जुड़ी समस्या होती है. लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में कब्ज किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि कब्ज की समस्या कब कैंसर बन जाती है और कब इससे सावधान हो जाना चाहिए. 

कब्ज क्या होता है?

कब्ज का मतलब है जब मल त्याग नियमित न हो, मल बहुत सख्त हो, मल त्याग में जोर लगाना पड़े और हफ्ते में 2–3 बार से कम शौच हो. जब यह समस्या 3 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बनी रहे, तो इसे दीर्घकालिक या क्रोनिक कब्ज कहा जाता है. इसके सामान्य लक्षण हफ्ते में 2 या उससे कम बार शौच जाना, मल का बहुत सख्त या सूखा होना, जोर लगाने पर भी पूरी तरह पेट साफ न होना और पेट में भारीपन या गैस है. अधिकतर मामलों में कब्ज के कारण फाइबर की कमी वाला खाना, पूरी तरह पानी न पीना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट और चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS) है. 

कब्ज की समस्या कब कैंसर बन जाती है

ज्यादातर मामलों में कब्ज कैंसर नहीं बनती है. लेकिन कुछ खास स्थितियों में लंबे समय तक रहने वाली कब्ज कैंसर का संकेत हो सकती है. कब्ज तब खतरनाक मानी जाती है जब कब्ज 3 हफ्तों से ज्यादा समय से बनी हो, अचानक मल त्याग की आदत बदल जाए, मल में खून आए या मल काला हो, बिना कारण वजन कम हो रहा हो. लगातार थकान महसूस हो, पेट में लगातार दर्द, भारीपन या गांठ लगे, कब्ज और दस्त बारी-बारी से हो रहे हों. ऐसे मामलों में कोलन कैंसर की जांच जरूरी हो जाती है. कोलन कैंसर बढ़ने पर आंत का रास्ता छोटा कर देता है, इससे मल आगे नहीं बढ़ पाता है. जिसके कारण लगातार कब्ज, दर्द और खून की समस्या होती हबै लेकिन कैंसर बहुत बढ़ने के बाद ही कब्ज पैदा करता है. कैंसर तभी कब्ज पैदा करता है जब ट्यूमर काफी बड़ा हो जाए, आंत का रास्ता आंशिक रूप से बंद होने लगे यानी शुरुआत में सिर्फ कब्ज होना, आमतौर पर कैंसर का संकेत नहीं होता है. 

कब इससे सावधान हो जाना चाहिए

1. कब्ज 3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे. खानपान बदलने, पानी पीने या घरेलू उपायों से भी ठीक न हो. 

2. मल में खून दिखाई दे, लाल खून या काले रंग का मल, यह अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है. 

3. पेट में लगातार या तेज दर्द हो. खासकर दर्द रोज-रोज बना रहे. पेट में भारीपन या गांठ जैसा महसूस होना. 

4. बिना वजह वजन कम होने लगे. डाइट बदले बिना वजन घटना खतरे का संकेत है. 

5. बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी महसूस हो. आराम करने के बाद भी थकान ठीक न हो. 

6. मल त्याग की आदत अचानक बदल जाए. पहले सब ठीक था, अब अचानक कब्ज रहने लगी या कब्ज और दस्त बार-बार बदल रहे हों. 

7. 45–50 साल की उम्र के बाद पहली बार लगातार कब्ज हो. इस उम्र में नई पाचन समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 

यह भी पढ़ें : क्या ठंड में रोज नहाना सेहत के लिए जरूरी है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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