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Prayagraj News: ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा शहर, माघ मेले की वजह से बढ़ी परेशानी

Prayagraj Traffic Jam: ट्रैफिक के काम में मदद के लिए होमगार्ड के 600 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनकी उपलब्धता भी महज 50 फीसदी के करीब ही है. 600 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 313 होमगार्ड ही हैं.

Prayagraj News: संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) इन दिनो ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है. शहर में इन दिनों हर तरफ जाम लगा रहता है, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. माघ मेले की वजह से यह समस्या और भी बढ़ गई हैं. लोगों का कहना है कि माघ मेले के दौरान इतना ट्रैफिक जाम उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखा. ट्रैफिक जाम की वैसे तो कई प्रमुख वजह है, लेकिन सबसे बड़ी वजह है ट्रैफिक पुलिस में स्टाफ की कमी. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रयागराज में इन दिनों ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल के जितने पद स्वीकृत हैं, उसके महज दस फीसदी ही ड्यूटी के लिए उपलब्ध हैं.

प्रयागराज में लंबे अरसे पहले ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल के 432 पद स्वीकृत किए गए थे. हालांकि जरूरत इससे तकरीबन दो गुना ज्यादा की थी. इतना ही नहीं शहर में इन दिनों माघ मेला लगा हुआ है. आस्था के इस मेले में रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु और हजारों वाहन आते हैं. ऐसे में स्वीकृत पदों की संख्या निश्चित तौर पर बढ़नी ही चाहिए थी. कांस्टेबलों की संख्या बढ़ाए जाने की बात छोड़ दीजिए, जितने स्वीकृत पद हैं उसके महज 10 फीसदी ही कॉन्स्टेबल इन दिनों ड्यूटी के लिए उपलब्ध हैं. 432 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 44 कांस्टेबल ही ड्यूटी के लिए मुहैया हैं और 388 पद खाली पड़े हुए हैं. 

लोगों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना 
ट्रैफिक जाम को कम करने में होमगार्डस की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. प्रयागराज शहर में ट्रैफिक के काम में मदद के लिए होमगार्ड के 600 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनकी उपलब्धता भी महज 50 फीसदी के करीब ही है. 600 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 313 होमगार्ड ही मुहैया हैं. 287 पद खाली पड़े हुए हैं. स्मार्ट सिटी और पुलिस कमिश्नरेट घोषित हो चुके प्रयागराज में ट्रैफिक पुलिस के अफसरों के वाहन चलाने के लिए मौजूदा समय में सिर्फ 9 ड्राइवर ही हैं. इसके अलावा हेड कॉन्स्टेबल के 108 स्वीकृत पदों में से 15 पद खाली हैं और सिर्फ 93 हेड कांस्टेबल ही ड्यूटी के लिए उपलब्ध हैं. हालांकि ट्रैफिक इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर की उपलब्धता स्वीकृत पदों से कुछ ज्यादा है.

ऐसे में समझा जा सकता है कि माघ मेले की वजह से जब शहर पर ट्रैफिक का बोझ दोगुना हो गया है तो 10 फीसदी कांस्टेबलों और 50 फीसदी होमगार्डों की उपलब्धता में ट्रैफिक पुलिस को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पहले माघ मेले के दौरान दूसरे जिले से ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों को प्रयागराज में कुछ दिनों के लिए ड्यूटी के लिए भेजा जाता था, लेकिन इस बार शहर सहित तमाम स्टाफ को मेले में अलग से भेज दिया गया. 

सरकार इस बार के माघ मेले को दो साल बाद लगने वाले कुंभ के रिहर्सल के तौर पर आयोजित कर रही है. बाकी मामलों में तो माघ मेला सफल माना जाएगा, लेकिन ट्रैफिक जाम के मामले में यह मामला पूरी तरह फिसड्डी साबित हुआ है. उम्मीद जताई जा रही है कि माघ मेला खत्म होने के बाद शहर को ट्रैफिक जाम की समस्या से कुछ निजात मिल सकती है. हालांकि ट्रैफिक स्टाफ की बेहद कमी के इस व्यवस्था में आगे भी बहुत ज्यादा सुधार होने की कोई गुंजाइश नहीं है.

समस्या कम होने के बजाय और बढ़ी
प्रयागराज का शायद ही कोई चौराहा और कोई सड़क ऐसी हो, जहां इन दिनों ट्रैफिक जाम ना हो रहा हो. मेले के आसपास के क्षेत्रों में तो अक्सर लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं. स्कूलों की छुट्टी के वक्त भी लंबा जाम लगा रहता है. इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. उम्मीद जताई जा रही थी कि पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद प्रयागराज में ट्रैफिक सुचारू रूप से चलेगा और लोगों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन कमिश्नरेट सिस्टम में यह समस्या कम होने के बजाय और भी बढ़ गई है. 

ट्रैफिक पुलिस पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा था. इसके अलावा अधिकारियों द्वारा कोई होमवर्क और प्लानिंग नहीं किए जाने से यह समस्या और बढ़ गई. लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के लिए अब ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. उनका रोजाना घंटों का वक्त ट्रैफिक जाम में बर्बाद होता है. स्कूल से छूटने वाले बच्चे घंटों परेशान होते हैं. हालांकि जिम्मेदार अफसरों का जवाब रटा- रटाया है.

एसीपी ट्रैफिक संतोष सिंह तो यह मानते हैं कि स्टाफ की कमी की वजह से इन दिनों जाम की समस्या हो रही है, लेकिन वह साथ ही यह भी दावा करते हैं कि माघ मेला खत्म होने के बाद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पहले की तरह पटरी पर आ जाएगी. उनका दावा है कि मेले में ट्रैफिक विभाग के अफसर पुलिस से तालमेल कर पूरे दिन ड्यूटी करते थे. कर्मचारियों की सक्रियता के चलते ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने की कोशिश की गई, लेकिन कई बार ट्रैफिक जाम के हालात जरूर बने.

कहा जा सकता है कि जब माघ मेले के दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह धड़ाम हो गई तो दो साल बाद लगने वाले कुंभ मेले के दौरान क्या होगा. कुंभ मेले में इस बार 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. रोजाना कई हजार की संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से छोटे बड़े वाहन शहर में आएंगे. अगर अभी से होमवर्क और प्लानिंग नहीं की गई तो कुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन में ट्रैफिक जाम बदनुमा दाग साबित हो सकता है.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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