अयोध्या: मोईद खान पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप, पीड़िता की मां अब जाएगी हाईकोर्ट
Ayodhya News: भदरसा गैंगरेप मामले में मोईद खान की निचली अदालत से रिहाई अब चुनौती में है. पीड़िता के परिवार और अन्य पक्षों ने कोर्ट को गुमराह करने और तथ्यों में हेरफेर का आरोप लगाया है.

उत्तर प्रदेश के चर्चित 'भदरसा गैंगरेप' मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान, जिन्हें हाल ही में निचली अदालत ने बाइज्जत बरी किया था, उनकी मुश्किलें फिर से बढ़ती नजर आ रही हैं.
पीड़िता के परिवार और अन्य पक्षों ने एक सामूहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया है कि अदालत को गुमराह करके यह फैसला हासिल किया गया है.
तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता की मां ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट के समक्ष 'मोहित' और 'मोईद' के नाम को लेकर तथ्यों में हेरफेर की गई. उनका दावा है कि परिवार रजिस्टर की नकल बिना किसी आधिकारिक अनुमति के हासिल की गई और उसे अदालत में इस तरह पेश किया गया जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई. पीड़िता की मां ने स्पष्ट किया कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी और जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करेंगी.
मोहित नामक युवक ने जताई आपत्ति
इस प्रेस वार्ता में 'मोहित' नाम का वह युवक भी मौजूद रहा, जिसके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कोर्ट में किया गया था. मोहित और उसकी मां ने मीडिया के सामने भावुक होते हुए कहा कि उनकी जानकारी के बिना उनके परिवार के निजी दस्तावेज और रजिस्टर की नकल निकलवाई गई. उन्होंने इसे निजता का उल्लंघन और अदालत के साथ धोखाधड़ी करार दिया है. इस मामले में थाना पूरा कलंदर में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है.
बीजेपी नेत्री और पीड़ित पक्ष एकजुट
बीजेपी नेत्री मंजू निषाद ने भी इस लड़ाई में पीड़ित परिवार का साथ देते हुए कहा कि न्यायपालिका के साथ छल किया गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से साक्ष्यों को प्रस्तुत किया गया, वह पूरी तरह से संदिग्ध है. अब पीड़ित पक्ष ने मोईद खान और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है.
क्या था मामला?
गौरतलब है कि भदरसा गैंगरेप मामले में करीब 19 महीने जेल में रहने के बाद निचली अदालत ने मोईद खान को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि दूसरे आरोपी राजू खान को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी. अब नए सिरे से दस्तावेजों और नाम की पहचान को लेकर उठे विवाद ने इस केस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट की संभावित अपील पर टिकी हैं.
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Source: IOCL

























