गोरखपुर: खामेनेई की शहादत पर भावुक हुए मौलाना शमशाद, बोले- जालिम के आगे नहीं झुकेगा सर
Gorakhpur News: गोरखपुर में 1 मार्च को आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर विशाल शोक सभा हुई. शिया-सुन्नी समुदाय ने इसमें भाग लिया. मौलाना शमशाद अब्बास ने इसे 'हुसैनी रवायत' बताया.

ईरान के सर्वोच्च नेता और विश्व शिया समुदाय के नायब-ए-इमाम आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर रविवार, 1 मार्च को गोरखपुर में एक विशाल शोक सभा का आयोजन किया गया.
गीता प्रेस रोड स्थित शेखपुर की शिया जामा मस्जिद और इमामबाड़ा अशरफुननिशा खानम परिसर में आयोजित इस सभा में शिया और सुन्नी समुदाय के साथ-साथ अमन पसंद नागरिकों ने बड़ी संख्या में शिरकत की.
'जालिम के आगे झुकना हुसैनी रवायत नहीं'
शोक सभा को संबोधित करते हुए शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शमशाद अब्बास ने भावुक शब्दों में कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत से पूरी इंसानियत अश्कबार (दुखी) है. उन्होंने कहा, "यह शहादत कोई अनजानी घटना नहीं थी, बल्कि खामेनेई साहब उस रवायत को दोहरा रहे थे जिसमें जालिम के आगे घुटने टेकना नहीं सिखाया जाता. इतिहास गवाह है कि हक पर लड़ने वालों की तादाद हमेशा कम रही है, लेकिन जीत हमेशा उन्हीं की हुई है."
कर्बला के संघर्ष से की तुलना
मौलाना शमशाद ने मौजूदा हालातों की तुलना कर्बला के मैदान से करते हुए कहा कि जिस तरह इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने दौर की महाशक्ति 'यजीद के पापी साम्राज्य' के सामने सिर झुकाने के बजाय शहादत को चुना था, ठीक उसी तरह इमाम खामेनेई ने आज के दौर के 'यजीदियों' की गुलामी को ठुकरा कर जाम-ए-शहादत कुबूल किया. उन्होंने कहा कि शहादत हुसैनियों की विरासत है और अल्लाह के अलावा हमारे लिए कोई दूसरी सुपर पावर नहीं है.
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ फूटा गुस्सा
सभा के दौरान अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को 'कायराना' करार दिया गया. उपस्थित लोगों ने अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे लगाए और वैश्विक स्तर पर हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की. वक्ताओं ने कहा कि यजीदी ताक़तें भले ही जश्न मनाएं, लेकिन इतिहास में वे हमेशा जलील होंगी और 'हुसैनी परचम' हमेशा बुलंद रहेगा.
भारी सुरक्षा और शांतिपूर्ण आयोजन
इस संवेदनशील अवसर पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन मुस्तैद रहा. शोक सभा पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जहां लोगों ने नम आंखों से अपने रहबर (नेता) को खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की.
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