UP Politics: यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले पंकज चौधरी ने किए बड़े बदलाव, बनाए तीन नए नियम
UP News: यूपी BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 2027 चुनावों से पहले 'कार्यकर्ता सर्वप्रथम' मंत्र अपनाया है. उन्होंने VIP कल्चर खत्म कर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद शुरू किया है.

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है. यूपी बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 'कार्यकर्ता सर्वप्रथम' के मूलमंत्र के साथ एक नई कार्यशैली और रणनीति लागू की है. इस नए प्रयोग का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना और उनसे सीधा 'वन-टू-वन' संवाद स्थापित करना है.
कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ने के लिए पंकज चौधरी ने लखनऊ स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में एक बड़ा बदलाव किया है. संवाद के बीच से 'वीआईपी कल्चर' खत्म करने के लिए कार्यालय से बड़ी-बड़ी मेजें हटा दी गई हैं और उनकी जगह अतिरिक्त कुर्सियां लगाई गई हैं. इसका मकसद यह है कि अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के बीच कोई 'बाधा' न रहे और अधिक से अधिक लोग एक साथ बैठकर बेझिझक अपनी बात रख सकें. प्रदेश अध्यक्ष अब लखनऊ प्रवास के दौरान नियमित रूप से दफ्तर में बैठकर कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे.
अध्यक्ष के 3 कड़े नियम
पार्टी को नई ऊर्जा देने और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पंकज चौधरी ने तीन प्रमुख नियम तय किए हैं:
- संगठनात्मक अनुशासन: पार्टी के भीतर अनुशासन सर्वोपरि होगा. अपनी बात सिर्फ 'पार्टी फोरम' पर ही रखनी होगी. पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बयानबाजी करने वाले नेताओं पर सख्ती जारी रहेगी.
- विकास योजनाओं की निगरानी: संगठन के स्तर पर सरकारी योजनाओं के लाभ की अलग से समीक्षा की जाएगी.
- जनता से प्रत्यक्ष संवाद: नेताओं और पदाधिकारियों को जनता और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर सीधा संवाद और समन्वय स्थापित करना होगा.
हर जिले में लागू होगा मासिक समीक्षा तंत्र
नई रणनीति के तहत प्रदेश के हर जिले में एक 'मासिक समीक्षा प्रणाली' लागू की जाएगी. इस तंत्र के जरिए संगठन यह परखेगा कि सरकारी योजनाएं धरातल पर कितनी प्रभावी हैं. साथ ही इस बात की भी मॉनिटरिंग होगी कि आम जनता और विशेष रूप से पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को इन योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं.
2027 की तैयारी: रूठों को मनाने पर फोकस
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी का पूरा फोकस उन कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लाने पर है, जो किसी कारणवश नाराज चल रहे हैं. वन-टू-वन मैपिंग और सीधे संवाद के जरिए चुनाव से पहले संगठन को एकजुट और धारदार बनाने की कोशिश की जा रही है.
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Source: IOCL


























