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Noida Twin Towers Demolition Reason: जानिए- क्यों गिराया जा रहा है सुपरटेक ट्विन टावर, क्यों मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट?

Noida Twin Towers Demolition: नोएडा (Noida) सेक्टर 93ए में बना सुपरटेक ट्विन टावर कोर्ट के आदेश पर 28 अगस्त को गिरा दिया जाएगा. जानिए क्या है पूरा मामला और ट्विन टावर गिराया जा रहा है.

Supertech Twin Towers Demolition: आज से लगभग 1 साल पहले 31 अगस्त 2021 को देश कि सबसे बड़ी अदालत ने नोएडा (Noida) सेक्टर 93ए में बने सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech Twin Towers) को अवैध घोषित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ये माना था कि ट्विन टावर को बनाने में नियमों की अनदेखी हुई है इतना ही नहीं इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी और आदेश दिए थे कि 3 महीने में यानी नवंबर 2021 तक टावर को गिरा दिया जाए. इस फैसले को एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के बायर्स की बड़ी जीत की तरह देखा गया क्योंकि रियल स्टेट के सेक्टर में ये बायर और बिल्डर के बीच एक बड़ा संग्राम था. जिसमें बायर्स की जीत हुई थी. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर टावर को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित क्यों किया?

28 अगस्त को गिराया जाएगा ट्विन टावर

दरअसल, ट्विन टावर के बगल में बनी सोसाइटी के दूसरे टावर के लोगों ने ट्विन टावर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी. क्योंकि उनका मानना था ये अवैध तरीके से बनाया जा रहा है. इस लड़ाई को लड़ने वालों का कहना है कि, ये लड़ाई आसान नहीं थी. पहले ये नोएडा अथॉरिटी से शुरू हुई इसके बाद हाईकोर्ट पहुंची और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा लेकिन सोसाइटी के आरडब्ल्यूए ने हार नहीं मानी. वो तब तक इस लड़ाई को लड़ते रहे जब तक टावर को अवैध घोषित करके इसे गिराने का आदेश नहीं दिया गया. हालांकि से अवैध घोषित करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावर को गिराने के लिए 3 महीने का समय दिया था. लेकिन अब एक साल बाद जाकर 28 अगस्त को अवैध तरीके से बने ट्विन टावर को ढहा दिया जाएगा.

जानिए क्या है पूरा मामला

ये बात है साल 2004 कि और दिन था 23 नवंबर, नोएडा अथॉरिटी ने इस दिन सेक्टर 93ए में ग्रुप हाउसिंग का प्लॉट नंबर 4 एमराल्ड कोर्ट को आवंटित किया. इस प्रोजेक्ट के तहत अथॉरिटी ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी को 14 टावर का नक्शा आवंटित किया. जिसमें सभी टावर ग्राउंड फ्लोर के साथ 9 मंजिल तक पास किए गए. इसके बाद साल 2006, 29 दिसंबर को नोएडा अथॉरिटी ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के प्रोजेक्ट में पहला संशोधन किया और दो मंजिल और बनाने का नक्शा पास किया. जिसके तहत 14 टावर मिलाकर ग्राउंड फ्लोर के अलावा 9 मंजिल की जगह 11 मंजिल बनाने का नक्शा पास हो गया. इसके बाद टावर 15 का भी नक्शा पास किया गया. इसके बाद नोएडा अथॉरिटी ने 16 टावर का नक्शा पास किया जिसके तहत अब कुल 16 टावर के लिए 11 मंजिल की इजाजत दी गई और इसकी ऊंचाई 37 मीटर की गई.

इसके बाद साल 2009, 26 नवंबर को नोएडा अथॉरिटी ने टावर नंबर 17 का नक्शा पास किया, जिसमें टावर नंबर 16 और 17 पर 24 मंजिल निर्माण का नक्शा बनाया गया और इसकी ऊंचाई 73 मीटर तय कर दी गई. नोएडा अथॉरिटी यहीं नहीं रुकी टावर के नक्शे में तीसरा संशोधन किया गया यह संशोधन 2 मार्च 2012 में किया गया जिसमें टावर नंबर 16 और 17 के लिए एफएआर और बढ़ा दिया गया जिसके तहत इन दोनों टावर की ऊंचाई 40 मंजिल तक करने की इजाजत दे दी गई और ऊंचाई 121 मीटर तय की गई.

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दो टावर्स के बीच हो 16 मीटर की दूरी

इस मामले में आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष उदय भान सिंह बताते हैं नेशनल बिल्डिंग कोड का नियम है कि किसी भी दो आवासीय टावर के बीच में कम से कम 16 मीटर की दूरी जरूर होनी चाहिए लेकिन इस प्रोजेक्ट में टावर नंबर 1 और ट्विन टावर में 9 मीटर से भी कम की दूरी है. उन्होंने बताया कि जहां पर टावर नंबर 16 और 17 बनाए गए हैं वहां पर बिल्डर ने लोगों को जब फ्लैट दिया था. तो उसे ओपन स्पेस दिखाया गया था, साल 2008 का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बिल्डर ने एमराल्ड कोर्ट में टावर नंबर 1 से 15 पर कब्जा करना शुरू कर दिया. इसके बाद 2009 में फ्लैट बायर्स ने आरडब्लूए बनाई और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने का फैसला किया. जिसके बाद संशोधन नक्शे पर तो दिखाए गए लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ और आरडब्ल्यूए और फ्लैट बायर्स के विरोध के बाद भी टावर नंबर 16 और 17 का अवैध तरीके से निर्माण होता रहा जिसको आज ट्विन टावर कहा जा रहा है.

24 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

ट्विन टावर के अवैध निर्माण के खिलाफ पहले आरडब्लूए नोएडा अथॉरिटी के पास पहुंचा. उदय भान सिंह बताते हैं कि अथॉरिटी ने इस मामले में बिल्डर का साथ दिया, जिसके बाद ये मामला जैसे तैसे हाई कोर्ट तक लेकर जाया गया और 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टावर को तोड़ने का आदेश दे दिया. वहीं इस मामले में 1 सितंबर  को अथॉरिटी के सीईओ ने एक कमेटी का गठन किया, 26 घंटे के अंदर ट्विन टावर से जुड़े जांच रिपोर्ट सामने आई. जिसमें 12 से 15 अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया, साल 2021 में एक हाई लेवल एसआईटी का गठन हुआ जिसमें पूरी जांच करके शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी और फिर 4 अक्टूबर 2021 को इस रिपोर्ट के आधार पर नोएडा अथॉरिटी के 24 अधिकारी और कर्मचारियों पर एफआईआर  की गई.

पिछले साल गिराया जाना था टावर

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को ट्विन टावर को गिराने का आदेश दिया था पर इसके लिए कोर्ट ने 3 महीने का समय दिया था लेकिन तब ऐसा नहीं हो पाया. जिसके बाद इसकी तारीख बढ़ाकर 22 मई 2022 कर दिया गया, लेकिन तब भी तैयारियां पूरी नहीं हो पाई और टावर नहीं गिर पाया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टावर गिराने वाली कंपनी को 3 महीने का समय और दिया जिसके बाद से 21 अगस्त 2022 को गिराया जाना था. लेकिन तब टावर गिराने वाली कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग को एनओसी नहीं मिली थी. इसलिए एक हफ्ते और बढ़ा दिया गया और 28 अगस्त को टावर गिरा दिया जाएगा.

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