मां चाहती थी बेटा बने डॉक्टर, रिक्शा चलाने वाले छात्र ने क्वालीफाई किया नीट
Muzaffarnagar News: यूपी के मुजफ्फरनगर में ई-रिक्शा चला-चला कर मोहम्मद सुहैल ने पास की NEET की परिक्षा, अब डॉक्टर बन गरीब बच्चों का सहारा बनना चाहता है. मां का सपना था कि बेटा डॉक्टर बने.

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर से बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आयी है जहां बच्चे लाखों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ते हैं, वहीं मुजफ्फरनगर के मोहम्मद सुहैल ने गरीबी, संघर्ष और हालातों को पीछे छोड़कर ई-रिक्शा चलाते-चलाते NEET परीक्षा पास कर दी. अब सुहैल का सपना डॉक्टर बनकर उन गरीब बच्चों की मदद करना है, जो पैसों की वजह से पढ़ाई छोड़ देते हैं.
सुहैल एक गरीब परिवार से आते हैं. मां-बाप की हैसियत नहीं थी कि दोनों बेटों को कॉलेज भेज सकें. बड़ा भाई पढ़ाई बीच में छोड़कर छोटे-मोटे काम करने लगा, लेकिन मां का सपना था कि उनका बेटा डॉक्टर बने. सुहैल बताते हैं कि, 'मां बचपन से कहती थीं- 'तू डॉक्टर बनेगा, लोगों का इलाज करेगा.' पर तब हमें नहीं पता था कि डॉक्टर बनने का रास्ता इतना कठिन होता है.'
रिक्शा चलाई हिम्मत नहीं हारी
2021 में 12 वीं पास करने के बाद सुहैल ने अपने पिता का ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया. रोज सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रिक्शा चलाते, ताकि परिवार का खर्च भी चले और कोचिंग की फीस भी भर सके. पहली बार जब उन्हें एक दोस्त ने NEET के बारे में बताया तो सुहैल ने गांव के ही एक ट्यूटर से 500 रुपये महीने पर ट्यूशन शुरू की.
सुहैल ने कहा, 'बचपन में लोग मुझे होशियार कहते थे, पर बाद में समझ आया कि मैं बस रटकर नंबर लाता था. असली मेहनत तब शुरू हुई जब डॉक्टर बनने का सपना सच्चाई में बदलने की ठानी.' हिंदी मीडियम से पढ़े सुहैल ने खुद इंटरनेट से अंग्रेजी सीखी, ताकि नीट की तैयारी कर सकें. पहली बार 2023 में नीट की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो पाए. दूसरे प्रयास में भी नाकामी हाथ लगी. लेकिन कहते हैं ना, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.
गरीबों की उम्मीद बनना चाहता है सुहैल
सुहैल की लगन और हालातों से लड़ने की जिद देखकर उन्हें एक नामी कोचिंग से स्कॉलरशिप मिल गई. फिर उन्होंने जी-जान लगाकर मेहनत की और तीसरे प्रयास में NEET UG 2025 पास कर पूरे जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. सुहैल कहते हैं, 'जिन हालात से मैं गुजरा हूं, मैं जानता हूं गरीबी क्या होती है. डॉक्टर बनकर मैं गरीब बच्चों की मदद करूंगा, ताकि पैसों की कमी किसी का सपना न तोड़े.
मुजफ्फरनगर के तिगरी गांव के सुहैल न सिर्फ अपने गांव से 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई करने वाले पहले लड़के बने, बल्कि अब डॉक्टर बनकर गरीब समाज के लिए उम्मीद की नई किरण भी बनेंगे. मां का सपना था और बेटे ने की मेहनत जिसके लिए चलाई रिक्शा, फिर बदल गई किस्मत. मोहम्मद सुहैल की ये कहानी हर उस बच्चे के लिए सबक है जो हालातों से हार मान जाता है.
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Source: IOCL






















