मुजफ्फरनगर में जल संरक्षण की पाठशाला, हैदरपुर वेटलैंड को मिलेगा ईको-टूरिज्म का विस्तार
Muzaffarnagar News:कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों से आए छात्र-छात्राओं ने नाटक, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘जल बचाओ, भविष्य बचाओ’ का संदेश दिया.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर स्थित मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में शुक्रवार को गंगा बैराज पर मौजूद हैदरपुर वेटलैंड को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. इसी कड़ी में यहां “पानी की पाठशाला” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता फैलाना रहा.
कार्यक्रम का शुभारंभ मंडलायुक्त सहारनपुर डॉ. रूपेश कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा, “पानी है तो जीवन है, इसलिए इसकी एक-एक बूंद का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है.” उन्होंने पानी की बर्बादी रोकने, पौधरोपण को बढ़ावा देने और किसानों से पराली न जलाने की अपील की. साथ ही उन्होंने उपस्थित लोगों को जल और पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई.
सांस्कृतिक कार्यक्रम से पर्यावरण सरंक्षण का संदेश
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों से आए छात्र-छात्राओं ने नाटक, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से “जल बचाओ, भविष्य बचाओ” का संदेश दिया. बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाया.
जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा ने कहा कि हैदरपुर वेटलैंड प्रदेश की एक अनमोल प्राकृतिक धरोहर है, जहां हर साल हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं. उन्होंने बताया कि वेटलैंड को पर्यटन के रूप में विकसित करने से न केवल इसका संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे.
कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पांडे, सेठपाल सिंह और कमल सिंह चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे. इसके साथ ही SSP संजय कुमार वर्मा सहित पूरा प्रशासनिक अमला कार्यक्रम में मौजूद रहा, जो इस पहल की गंभीरता को दर्शाता है.
ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
गौरतलब है कि हैदरपुर वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है. प्रशासन का लक्ष्य है कि यहां ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए.
कुल मिलाकर, “पानी की पाठशाला” कार्यक्रम ने बच्चों, आम नागरिकों और प्रशासन को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिया है. आने वाले समय में हैदरपुर वेटलैंड का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होना जिले के लिए नई पहचान साबित होगा.























