मिल्कीपुर उपचुनाव में ब्राह्मण वोटर बनेगा ट्रंप कार्ड? जानें क्या है इस सीट का पूरा समीकरण
Milkipur Bypoll Election 2025: मिल्कीपुर उपचुनाव में सियासी तपिश बढ़ गई है. यहां पर मुख्य मुकाबला सपा और बीजेपी के बीच है, ऐसे में दोनों सियासी दल मतदाताओं को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

Milkipur By Election 2025: उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में दलित, पिछड़ा के साथ अगड़ा वोट खासकर ब्राह्मण भी ट्रंप कार्ड है. इसको पाने की चुनौती समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों के सामने होगी. दोनों दल इस वोट बैंक को साधने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अयोध्या के मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए बीजेपी की तरफ से भी प्रत्याशी का ऐलान होते ही अब सपा और बीजेपी के बीच ही सीधी लड़ाई नजर आ रही है. एक चुनावी आंकड़े के मुताबिक, इस विधानसभा क्षेत्र में पासी बिरादरी के बाद सर्वाधिक ब्राह्मण मतदाता हैं. इस वर्ग को अपने-अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी और सपा हाथ-पांव मार रही है.
'ब्राह्मण वोटर ट्रंप कार्ड'
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि मिल्कीपुर विधानसभा में अभी तक की राजनीति देखें तो यहां पर अपर कास्ट का वोट बहुत महत्वपूर्ण है. उसमें भी इस चुनाव में सबसे ज्यादा ब्राह्मण मतदाता ट्रंप कार्ड साबित होगा, क्योंकि जितना वहां पासी समाज का वोट है, उतना ही करीब-करीब ब्राह्मण समाज का भी वोट बैंक है.
अवधेश प्रसाद को मित्रसेन के कारण यादव वोट बैंक पूरा नहीं मिलता था. इस वोट बैंक में बिखराव हो जाता था. मित्रसेन के बाद उनके बेटे आ गए. जिस संख्या में और जगह यादव वोट बैंक मिलता, यहां नहीं मिलता था. इसी कारण वह पासी के साथ अपर कास्ट को साधते रहे हैं. अगड़े वोट बैंक को उन्होंने साध रखा था.
सपा सांसद अवधेश प्रसाद पिछले चुनाव में पासी, कुछ यादव और ब्राह्मण वोट बैंक के कॉम्बिनेशन से जीतते आए हैं. 2017 में लहर के कारण बीजेपी को जीत मिली थी. अगड़ा वोट बैंक बीजेपी में शिफ्ट हो गया था. राजीव ने बताया कि यादव वोट बैंक को एक करने के लिए सपा मुखिया ने मित्रसेन के बेटे आनंद सेन को एक करने की कोशिश की है. अब देखना है कि वह कितना रंग लाता है.
पासी वोट बैंक होगा बिखराव?
राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार भी बीजेपी के पासवान उम्मीदवार उतारने के कारण पासी वोट बैंक में बिखराव होगा. जीत के लिए अगड़ा वोट बैंक जरूरी है. वो जिधर चला गया, उसकी जीत सुनिश्चित है. इसी कारण इस वोट बैंक के लिए दोनों दलों ने ताकत झोंक रखी है.
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा ने मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक पवन पांडेय के जरिए ब्राह्मण वोट बैंक को गोलबंदी करने की ताकत लगाई है. बीजेपी ने ब्राह्मण मतों को साधने के लिए महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय समेत अपने पुराने ब्राह्मण नेताओं को मोर्चे पर लगाया है.
सपा की बड़ी जीत का दावा
पवन पांडेय का कहना है कि मिल्कीपुर विधानसभा में ब्राह्मण समाज एक तरफा साइकिल की ओर जा रहा है. क्योंकि जब से यह सरकार आई है, तब से इस समाज के साथ बहुत अत्याचार हुआ है. यह वर्ग पढ़ा-लिखा और अपना भला जनता है. इसी कारण वह समाजवादी पार्टी के साथ है. मिल्कीपुर में सपा बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है.
बीजेपी का गंभीर आरोप
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे का कहना है कि समाजवादी पार्टी की जब भी यूपी में सरकार रही, तब गुंडे अपराधियों और माफियाओं को प्रदेश लूटने की आजादी थी. सपा पूरी तरह से परिवारवादी और जातिवादी है. इस पर जनता का भरोसा नहीं है. जबकि बीजेपी 'सबका साथ, सबका विकास' को लेकर चलती है. यहां पर सबका सम्मान है. सपा ने मिल्कीपुर सीट से एक सांसद के बेटे को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने अपने एक साधारण कार्यकर्ता को उतारा है. यही अंतर इनकी सोच को दिखाता है.
मिल्कीपुर उपचुनाव शेड्यूल
मिल्कीपुर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने सांसद अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है, जबकि बीजेपी ने चंद्रभानु पासवान पर दांव खेला है. बीएसपी ने उपचुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. ऐसे में बीएसपी का वोट किधर जाता है, इस पर भी सभी की नजरें रहेंगी. ज्ञात हो कि मिल्कीपुर में पांच फरवरी को मतदान होगा और आठ फरवरी को नतीजे आएंगे.
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