दिवाली से पहले मेरठ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 10 लाख के अवैध पटाखे बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार
Meerut News: यह पटाखे उत्तराखंड से लाकर मेरठ में खपाए जा रहे हैं. मामले की जानकारी मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस व स्वॉट टीम को संयुक्त रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए.

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद की सिविल लाइन पुलिस और स्वाट टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस टीम ने दीपावली से पहले अवैध पटाखों के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 लाख रुपए के पटाखे बरामद किए हैं. संयुक्त छापेमारी में उत्तराखंड के सप्लायर सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है.
दीपावली से पहले बड़ी संख्या में कच लोग अवैध रूप से पटाखे का काम करते हैं, जिससे कभी-कभार हादसा भी हो जाता है. लेकिन इस बार पुलिस ने पहले से ही अवैध पटाखा कारोबार करने वालों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है.
उत्तराखंड से मेरठ में खपाए जा रहे थे पटाखे
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने सिविल लाइन थाने में प्रेस वार्ता के दौरान कार्रवाई का खुलासा करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले कोतवाली क्षेत्र में एक व्यक्ति को अवैध पटाखों से भरा बोरा ले जाते हुए पकड़ा गया था. पूछताछ में सामने आया कि यह पटाखे उत्तराखंड से लाकर मेरठ में खपाए जा रहे हैं. मामले की जानकारी मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस व स्वॉट टीम को संयुक्त रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए.
मिनी लोडर में भरे थे लाखों के पटाखे
टीमों ने जांच के दौरान सिविल लाइन क्षेत्र स्थित न्यू बसंत विहार कॉलोनी निवासी प्रमोद बंसल और उत्तराखंड के काशीपुर निवासी सप्लायर भीमसेन को गिरफ्तार किया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक छोटा हाथी वाहन में लदे लाखों रुपए के पटाखे बरामद किए. बरामदगी के बाद दोनों को थाने लाकर सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें भीमसेन ने स्वीकार किया कि वह काशीपुर से बड़ी मात्रा में पटाखे लाकर प्रमोद बंसल को सप्लाई करता था. प्रमोद इन पटाखों को शहर के विभिन्न इलाकों में छोटे व्यापारियों को बेचता था.
10 लाख कीमत के हैं पटाखे
एसपी सिटी ने बताया कि बरामद किए गए पटाखों की कीमत करीब 10 लाख रुपए आंकी गई है. आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस अब दोनों आरोपियों से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या पहले भी इसी तरह की सप्लाई तो नहीं की गई थी.
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Source: IOCL





















