महोबा शिक्षा विभाग में बवाल, निलंबित प्रिंसिपल ने BSA पर लगाए शोषण के गंभीर आरोप, DM ने बिठाई जांच
Mahoba News In Hindi: महोबा के तिंदौली प्राथमिक विद्यालय में निलंबित प्रधानाध्यापिका ने BSA पर शोषण और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. वहीं BSA ने आरोपों को जांच प्रभावित करने की साजिश बताया.

महोबा के कबरई ब्लॉक के तिन्दौली गांव का प्राथमिक विद्यालय इस समय विवादों का केंद्र बना हुआ है. भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप में निलंबित हुई प्रधानाध्यापिका ने अब जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी पर शारीरिक शोषण के प्रयास और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
वहीं, BSA और अन्य शिक्षकों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे निलंबन की कार्रवाई से बचने के लिए रचा गया षड्यंत्र करार दिया है. इस पूरे मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो एक सप्ताह के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी.
क्या है पूरा मामला
महोबा शिक्षा विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब कबरई ब्लॉक के तिन्दौली प्राथमिक विद्यालय की निलंबित प्रधानाध्यापिका ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर बेसिक शिक्षा अधिकारी पर संगीन आरोप मढ़ दिए. निलंबित प्रधानाध्यापिका ने एसपी को शिकायत देने के बाद रविवार को एक होटल में पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया कि बीएसए राहुल मिश्रा पिछले डेढ़ साल से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे स्कूल की बाउंड्री वॉल की समस्या लेकर गईं, तो बीएसए ने उनके साथ अभद्रता की और अनैतिक मांगें रखीं. उन्होंने स्कूल की ही सहायक अध्यापिका नम्रता कौशिक और पुरुषोत्तम पर भी इस प्रताड़ना में सहयोग करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया है.
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सहायक अध्यापिका ने एसपी से की शिकायत
वहीं दूसरी तरफ इन आरोपों के सामने आते ही विभाग में जवाबी शिकायतों का दौर शुरू हो गया है. विद्यालय की सहायक अध्यापिका नम्रता कौशिक अन्य शिक्षकों के साथ शिकायत लेकर एसपी के यहां पहुंची. इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रधानाध्यापिका स्वयं विद्यालय में भ्रष्टाचार और मिड-डे मील में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार हैं. नम्रता का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका महिला होने का फायदा उठाकर झूठे केसों में फंसाने की धमकी देती हैं और पहले भी कई शिक्षकों पर ऐसे ही आरोप लगा चुकी हैं. इन्होंने विद्यालय में रहते हुए मुझसे विवाद झगड़ा किया फिर विभाग और प्रशासन की जांच में इनके ऊपर अनियमिताओं और लापरवाही कर आरोप सही पाए जाने पर इन्हें निलंबित किया गया. तभी से ये रंजिश मानती है और जो भी इनकी जांच करता है उनके ऊपर ये ऐसे ही शारीरिक शोषण के झूठे आरोप लगाकर अपनी जांच की दबाने का प्रयास करती है.
जांच के लिए जिलाधिकारी ने गठित की टीम
इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए बीएसए राहुल मिश्रा ने कहा कि प्रधानाध्यापिका पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप जांच में सिद्ध हो चुके हैं. उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में हुई प्रशासनिक जांच के आधार पर ही उन्हें 28 जनवरी 2026 को निलंबित किया गया था. बीएसए के अनुसार, निलंबन को लेकर और जांच को दबाने के लिए ही महिला द्वारा मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
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Source: IOCL



























