महोबाः फसल बीमा घोटाले को लेकर किसानों में आक्रोश, जांच की मांग
महोबा में फसल बीमा घोटाले को लेकर किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. किसानों ने नवागत डीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की.

महोबा में किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कथित घोटाले के विरोध में किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. कलेक्ट्रेट में जय जवान जय किसान एसोसिएशन के बैनर तले 200 से अधिक किसानों ने नवागत डीएम प्रभास कुमार को ज्ञापन सौंपा. किसानों ने डीएम से पूरे मामले की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गुहार लगाई है.
दरअसल, सदर तहसील में पिछले 404 दिनों से जारी धरने के बावजूद समाधान न मिलने पर किसानों ने नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा. बताया गया कि जय जवान जय किसान एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह के नेतृत्व में करीब 200 किसान बारिश के बीच कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर नारेबाजी की.
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उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग
किसानों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में व्यापक पैमाने पर संगठित भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. एसोसिएशन का यह धरना सदर तहसील प्रांगण में पिछले 404 दिनों से लगातार चल रहा है. इस दौरान किसानों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए खून से पत्र तक लिखे, लेकिन शासन और प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी.
'फसल बीमा घोटाला किसानों के हक में डाका'
जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि फसल बीमा घोटाला किसानों के हक पर डाका है. हमने कई बार एसआईटी और सीबीआई जांच की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. जब तक एसआईटी का गठन नहीं होता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक तहसील में धरना जारी रहेगा और बीच-बीच में ऐसे ही बड़े प्रदर्शन किए जाएंगे.
प्रशासनिक उदासीनता पर किसानों ने उठाए सवाल
वहीं, किसान नेता मनोहर सिंह ने प्रशासनिक शिथिलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में लगभग 190 लोगों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है, फिर भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं. शासन-प्रशासन की क्या मजबूरी है कि आज तक सीबीआई या एसआईटी जांच के आदेश नहीं दिए गए? किसानों ने नए जिलाधिकारी प्रभास कुमार से उम्मीद जताई है कि वे मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल पारदर्शी जांच कराएंगे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके तथा दोषियों को जेल भेजा जा सके.
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