लखनऊ: प्रॉपर्टी म्यूटेशन फीस में बड़ी राहत, अब 1000 वर्गफीट तक लगेंगे सिर्फ इतने रुपये
Lucknow News In Hindi: शासन ने नगर निगम के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मकान के क्षेत्रफल के हिसाब से नई फीस तय कर दी है. नए शुल्क का लाभ भवनस्वामियों को करीब 10 दिन में मिलने लगेगा.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में संपत्ति के उत्तराधिकार या वसीयत के आधार पर दाखिल-खारिज कराने वालों को बड़ी राहत मिली है. अब गृहकर म्यूटेशन (नामांतरण) के लिए पहले की तरह सभी संपत्तियों पर एक समान 5 हजार रुपये शुल्क नहीं देना होगा.
शासन ने नगर निगम के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मकान के क्षेत्रफल के हिसाब से नई फीस तय कर दी है. नए शुल्क का लाभ भवनस्वामियों को करीब 10 दिन में मिलने लगेगा.
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पहले सभी के लिए थी 5 हजार रुपये फीस
नगर निगम अभी तक पारिवारिक संपत्तियों के नामांतरण पर 5 हजार रुपये जमा करवाता था. वो चाहें 100 वर्गमीटर का हो या 10 हजार वर्गफीट के बड़े बंगले तक के लिए एक ही फीस निर्धारित थी. नई व्यवस्था में मकान के आकार के अनुसार अलग-अलग शुल्क देना होगा.
छोटे मकान मालिकों को पांच गुना तक राहत
नई व्यवस्था में 1000 वर्गफीट तक के मकान के नामांतरण पर सिर्फ 1000 रुपये शुल्क लगेगा। यानी मौजूदा 5 हजार रुपये की तुलना में फीस पांच गुना कम हो जाएगी. इसी तरह 1001 से 2000 वर्गफीट तक के मकान के लिए 2000 रुपये और 2001 से 3000 वर्गफीट तक के लिए 3000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. 3000 वर्गफीट से बड़े मकानों के लिए अधिकतम 5000 रुपये फीस होगी.
वसीयत और उत्तराधिकार के मामलों में लागू होगी नई दर
यह राहत खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार या वसीयत के आधार पर संपत्ति का नामांतरण कराते हैं. इससे पहले शुल्क में सभी संपत्तियों के लिए समान दर होने के कारण छोटे मकान मालिकों पर भी अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक बोझ पड़ता था.
बैनामे पर पहले ही मिल चुकी थी राहत
करीब दो साल पहले नगर निगम संपत्ति के दाखिल-खारिज के लिए उसकी कीमत का एक प्रतिशत शुल्क लेता था. शासन के निर्देश के बाद शुल्क कम किया गया था। बैनामे के आधार पर नामांतरण कराने वालों को इसका लाभ मिला, लेकिन पैतृक संपत्ति या उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण कराने वालों के लिए फीस में राहत नहीं हुई थी.
इस मुद्दे को लेकर सवाल उठने के बाद शासन स्तर पर मामला पहुंचा. इसके बाद वसीयत और उत्तराधिकार के आधार पर संपत्ति के नामांतरण शुल्क को कम करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन ने अब नई दरों का आदेश जारी कर दिया है.
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