फतेहपुर सीकरीः अभी तक है कांग्रेस को खाता खुलने का इंतजार
2008 में अस्तित्व में आई फतेहपुर सीकरी सीट पर यह तीसरा लोकसभा चुनाव है। अभी तक यहां कांग्रेस को सफलता नहीं मिली है। देखना ये होगा कि क्या इस बार राज बब्बर पार्टी का खाता खोल पाएंगे।

फतेहपुर सीकरी, एबीपी गंगा। मथुरा से सटी फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला है। साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अभी तक कांग्रेस पार्टी खाता नहीं खोल पाई है। इस सीट पर पहली जीत बहुजन समाज पार्टी जीत ने दर्ज की थी। दूसरी बार (साल 2014) भारतीय जनता पार्टी ने यहां अपना परचम लहराया था। वहीं, अब की बार भाजपा को सीट बचाने के लिए बसपा के साथ ही सपा का भी मुकाबला करना होगा। इसके अलावा कांग्रेस ने भी यहां से दिग्गज नेता राज बब्बर को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
ये है सीट का इतिहास इस सीट पर अबकी बार यह तीसरा चुनाव होगा। 2009 में यहां बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी थी। 2014 में मोदी लहर का असर यहां भी दिखा और चौधरी बाबूलाल ने 45 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। बाबूलाल ने अपने प्रतिद्वंदी को करीब पौने दो लाख वोटों से मात दी थी। 2014 के चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता रहे अमर सिंह ने भी राष्ट्रीय लोक दल के टिकट से चुनाव लड़ा था।राजनीतिक समीकरण 2014 के आंकड़ों के अनुसार फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर करीब 16 लाख वोटर हैं। इनमें 8.7 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला वोटर शामिल हैं। जातिगत आंकड़ों को देखें तो ये सीट भी जाट बहुल बेल्ट के अंतर्गत ही आती है, राष्ट्रीय लोकदल का भी यहां पर बड़ा प्रभाव रहा है। इस सीट के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें आगरा ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद और बाह विधानसभा सीट शामिल है। 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव यहां पांचों सीटों पर बीजेपी ने ही जीत दर्ज की थी।
इस बार ये हैं मैदान में इस बार फतेहपुर सीकरी से भाजपा ने राजकुमार चाहर पर दांव लगाया है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर राजवीर सिंह को उतारा है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने यहां से अभिनेता और यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बब्बर को टिकट दिया है।
कौन हैं चौधरी बाबूलाल चौधरी बाबूलाल की गिनती यहां के पुराने नेताओं में होती है। बाबूलाल ने 1977 में जिला पंचायत सदस्य के तौर पर शुरुआत की, जिसके बाद वह दो बार विधायक भी रहे। 2002 की यूपी सरकार में उन्होंने बतौर मंत्री भी काम किया। 2014 में वह पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए।



















