प्रयागराज में स्थित है दुनिया का अनोखा मंदिर, यहां बजरंगी लेटकर देते हैं भक्तों को आशीर्वाद
बजरंग बली लंका युद्ध के दौरान बुरी तरह जख़्मी हो गए थे और संगम किनारे बेहोश होकर लेट गए थे। माता सीता ने अपने सिंदूर का दान देकर बजरंगी को नया जीवन दिया था।

प्रयागराज, मोहम्मद मोईन। देश के ज़्यादातर हिस्सों में पवनपुत्र हनुमान की जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, लेकिन संगम के शहर प्रयागराज में बजरंग बली का अवतरण दिवस नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली को मनाया जाता है।
प्रयागराज में शनिवार को संगम तट पर स्थित लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर में भी हनुमान जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस मौके पर पूरे मंदिर परिसर को खूबसूरती से सजाया गया तो साथ ही बजरंग बली की लेटी हुई प्रतिमा का भव्य श्रृंगार किया गया।
हनुमान जयंती पर यहां शाम को बजरंग बली की विशेष आरती व पूजा-अर्चना की गई और साथ ही उन्हें छप्पन तरह के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। इस मौके पर पवन पुत्र के दर्शन और उनकी पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ा।

बता दें कि, दुनिया का यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां बजरंग बली आराम की मुद्रा में लेटकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रद्धालु यहां बजरंग बली की लेटी हुई प्रतिमा का दर्शन पूजन करते हैं। इस खास मौके पर बजरंग बली से अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनने में आ रही रुकावटें दूर किये जाने की कामना की गई।
दुनिया में अपनी तरह के इस इस अनूठे मंदिर के साथ रामभक्त हनुमान के पुनर्जन्म की वह कथा जुड़ी हुई है, जिसमें बजरंग बली लंका युद्ध के दौरान बुरी तरह जख़्मी हो गए थे और यहीं संगम किनारे बेहोश होकर लेट गए थे। मान्यता है कि उस वक्त माता सीता ने अपने सिंदूर का दान देकर उन्हें नया जीवन दिया था।
मंदिर में हनुमान जयंती के सभी कार्यक्रम अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की अगुवाई में आयोजित हुए। हनुमान जयन्ती पर अयोध्या में भगवान राम का भव्य राम मंदिर जल्द ही बनने की कामना भी की गई।
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