संसद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर करण भूषण का हमला, बोले- नौटंकी करने...
Gonda News In Hindi: कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई राजनीतिक मुद्दों बयान दिया. उन्होंने संसद में भेष बदलकर या नाटकीय तरीके से विरोध करने को भी अनुचित बताया.

गोंडा के कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने अपने निज निवास विश्नोहरपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कई राजनीतिक मुद्दों पर अपना बयान दिया है. राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर संसद में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला जांच के दायरे में है तो उसे कानून के अनुसार चलने देना चाहिए. यदि आप बहस करना चाहती है तो बहस कीजिए यह सब नौटंकी करने से कुछ नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का भेष बदलकर या नाटकीय तरीके से विरोध करना उचित नहीं है. इससे सनातन समाज की भावनाएं आहत होती हैं. उन्होंने कहा कि यदि बहस करनी है तो गरिमा के साथ की जाए, संसद परिसर में इस तरह का आचरण उचित नहीं है. यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना ही है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में कोई दोषी पाया जाता है तो बीजेपी देगी सजा
करण भूषण सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि इस मामले का भारतीय जनता पार्टी पर कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा और यदि किसी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति का इस्तीफा देने से पूरी व्यवस्था नहीं बदलती. संसद में इस विषय पर चर्चा हुई है और सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीरता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि बदलाव की आवश्यकता है और सरकार इस दिशा में काम कर रही है.
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'प्रदर्शन सही दिशा में चल रहा था, मगर अराजक तत्वों ने इसे भटकाया'
बाबा रामदेव ने ABP न्यूज के एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अभी भी गुलामी शिक्षा पद्धत लागू है इस पर करण भूषण सिंह ने कहा कि बदलाव होगा और प्रक्रिया जारी है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्य फोकस नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हो सके.
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखना गलत नहीं है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कुछ अराजक तत्व शामिल हो गए, जिससे आंदोलन का माहौल बिगड़ गया. उनके अनुसार प्रदर्शन सही दिशा में चल रहा था, लेकिन बाहरी तत्वों ने इसे भटकाने का प्रयास किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों को सरकार को घेरने का एक मंच मिल गया और इसी कारण विरोध प्रदर्शन का स्वरूप बदल गया.
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