'गृहयुद्ध से बचना है तो UGC कानून...', जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने दी सरकार को चेतावनी
Rambhadracharya On UGC: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने UGC को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को ये कानून वापस लेना ही होगा, उनके धर्माचार्य रहते इसे लागू नहीं किया जा सकता.

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूजीसी नियमों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस क़ानून को वापस लेना होगा, ये कानून लागू नहीं हो सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देश को गृहयुद्ध से बचाना है तो इस क़ानून को वापस लेना ही पड़ेगा. उनके रहते इस क़ानून को लागू नहीं किया जा सकता है.
जगद्गुरु रामभद्राचार्य शुक्रवार को बस्ती पहुंचे थे, जहां उन्होंने रामकथा कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान रामभद्राचार्य ने UGC को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार को ये कानून वापस लेना ही होगा, उनके धर्माचार्य रहते ये कानून लागू नहीं हो सकता.
यूजीसी को सरकार को दी चेतावनी
रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार को घेरते हुए सवाल पूछा कि यूजीसी गाइडलाइंस की क्या आवश्यकता थी? समाज में क्यों भेदभाव किया जा रहा है. सरकार को अगर इस देश को गृहयुद्ध से बचाना है तो इस कानून को वापस लेना ही होगा. समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं है.
'ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा'
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा है. दुर्भाग्य से अनेक ब्राह्मण मांस सेवन, मछली खाने और शराब का सेवन करने लगे हैं. ऐसे ब्राह्मणों को स्वयं जागरूक होना होगा. उन्होंने कहा कि बस्ती को वशिष्ठ नगर होना ही होगा. यहां के बढ़नी मिश्र गांव की अपनी अध्यात्मिक विशेषता है. गुरू वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर किया था. अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होता.
रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरू वशिष्ठ ने सिर्फ राजकुमारों को ही सभी वर्गों को शिक्षा दी थी. उन्होंने कहा कि जो रामजी का है वो सभी का है. उसको छूने से कोई पाप नहीं है. गुरु वशिष्ठ छुआछूत के विरोधी थी. इसका पालन हम सबको भी करना चाहिए.
बता दें कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस का सवर्ण समाज में खासा विरोध देखने को मिल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभी रोक लगा दी है. वहीं दूसरी तरफ ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लोग इसका समर्थन कर रहे हैं और यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं.
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