हरिद्वार: जूना अखाड़े ने वाल्मीकि अखाड़े को दी मान्यता, साधु-संतों में हलचल तेज, फैसले पर उठे सवाल
Haridwar News: जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण हरि गिरि महाराज ने कहा कि वाल्मीकि परंपरा तो बहुत प्राचीन है, यह आदि से थी और हमेशा रहेगी. जिसको कहीं स्थान नहीं मिलता उसका जूना अखाड़ा है.

हरिद्वार में जूना अखाड़े द्वारा वाल्मीकि अखाड़े को मान्यता दे दी है, जिसे लेकर साधु-संतों में हलचल तेज हो गई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाल्मीकि अखाड़े को 13 अखाड़ों के अलावा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में मान्यता और स्थान मिल पाएगा? क्या यह अखाड़ा परंपरा के नियमों में एक नया अध्याय है या आने वाले दिनों में इसको लेकर अखाड़ा परिषद के भीतर बड़ा विवाद खड़ा होने वाला है?
दरअसल आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा सनातन धर्म की रक्षा के लिए स्थापित की गई अखाड़ा परंपरा में सदियों से 13 अखाड़ों को ही मान्यता प्राप्त रही है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बैनर तले यही 13 अखाड़े कुंभ मेलों में अमृत स्नान करते आए हैं. लेकिन इस बार वाल्मीकि अखाड़े को मान्यता मिल गई है. जिसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है.
जूना अखाड़े ने दी वाल्मीकि अखाड़े को मान्यता
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण हरि गिरि महाराज का कहना है कि यह परंपरा है कि आपके यहां कोई आता है तो उसका सम्मान किया जाता है. पहले इनको जूना अखाड़े के आचार्य जी ने अभिषेक करके अनेक पदों पर आसीन किया. वाल्मीकि परंपरा तो बहुत प्राचीन है, यह आदि से थी और हमेशा रहेगी. जिसको कहीं स्थान नहीं मिलता उसका जूना अखाड़ा है और रहेगा. महंत हरि गिरि महाराज के बयानों से साफ है कि जूना अखाड़ा वाल्मीकि परंपरा को अत्यंत प्राचीन मानते हुए उनका स्वागत कर रहा है.
वाल्मीकि अखाड़े के पीठाधीश्वर ने जताई खुशी
वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर कृष्ण शाह विद्यानंद गिरि महाराज का दावा है कि वाल्मीकि अखाड़े को विधिवत मान्यता मिल चुकी है और वे कुंभ में अन्य अखाड़ों के साथ स्नान करेंगे. इनका कहना है कि महामंडलेश्वर स्वामी संतोष शाह महाराज ने वाल्मीकि अखाड़े का निर्माण किया था. जूना अखाड़े के नेतृत्व में और सभी संत-महापुरुषों की मौजूदगी में वाल्मीकि अखाड़े को स्वीकार किया गया है.
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महाराज जी ने घोषणा की है कि वाल्मीकि अखाड़े को भी सम्मान के साथ कुंभ में स्नान करने का अवसर मिलेगा और यह अखाड़ा परिषद का हिस्सा रहेगा.
एक तरफ जूना अखाड़ा वाल्मीकि अखाड़े को अपने साथ जोड़ने और सम्मान देने की बात कह रहा है, तो वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अन्य धड़ों की प्रतिक्रिया आनी बाकी है. अखाड़ा परिषद के नियमों के अनुसार 13 अखाड़ों के अतिरिक्त किसी 14वें अखाड़े को मान्यता देना आसान नहीं माना जाता है. ऐसे में आने वाले दिनों पर इस पर बहस तेज हो सकती है.
























