गोरखपुर: छठे रोजे की बीच जबरदस्त जोश, रोजेदारों ने दुनिया में अमन की मांगी दुआ
Ramzan 2026: गोरखपुर में माह-ए-रमजान के छठे रोजे के बीच रोजेदारों में जबरदस्त जोश दिख रहा है. रोजेदारों ने पूरी दुनिया के लिए अमन-चैन की दुआ मांगी है.

गोरखपुर में माह-ए-रमजान का छठा रोजा अल्लाह की इबादत में बीत रहा है. रोजेदारों ने इबादतों के जरिए अल्लाह को राजी करने की कोशिश की. अल्लाह की खास रहमत बंदों पर उतर रही है. रोजेदारों में जबरदस्त जोश देखने को मिल रहा है.
रोजेदारों ने पूरी दुनिया में अमन-चैन और अपने व अपने परिवार के लिए, गरीबों, यतीमों, पीड़ित लाचार, बेसहारा लोगों के लिए दुआ मांगी. रोजेदारों ने नमाज पढ़कर, कुरआन की तिलावत कर, दुरूद ओ सलाम पेश कर, तस्बीह फेर, सदका खैरात कर नेकियां बटोरीं.
मस्जिदों में नजर आ रही नमाजियों की भीड़
रमजान के पाक महीने में इफ्तार-सहरी की रौनक बरकरार हैं. मस्जिद की सफें भरी नजर आ रही हैं. तरावीह की नमाज जारी है. मस्जिद व घरों में रौनक है. कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर रोजेदार नेकियां कमा रहे हैं.
मालिके निसाब जकात व सदका-ए-फित्र अदा कर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. मस्जिदों में रात की तरावीह की नमाज के अलावा पांच वक्त की फर्ज नमाजों में खूब भीड़ हो रही है. सर पर टोपी रखे रोजेदार बच्चे व नौजवान हर जगह दिख रहे हैं. बच्चे भी खूब इबादत कर रहे हैं. इस दौरान बाजार भी गुलजार है.
इस्लाम में जकात फर्ज है जल्द अदा करें- मुफ्ती शुऐब
मुफ्ती मुहम्मद शुऐब रजा निजामी ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम में जकात फर्ज है. जकात पर मोहताज, गरीबों, यतीमों, बेवाओं का हक है जो मालिके निसाब न हों. इसे जल्द से जल्द हकदारों मुसलमानों तक पहुंचा दें ताकि वह रमजान व ईद की खुशियों में शामिल हो सकें.
उन्होंने कहा कि अगर आप मालिके निसाब हैं तो हकदार को जकात जरूर दें, क्योंकि जकात न देने पर सख्त अजाब का बयान कुरआन-ए-पाक में आया है. जकात हलाल और जायज तरीके से कमाए हुए माल में से दी जाए.
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने क्या कहा?
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मोहम्मद नदीम ने बताया कि रमजान में हर आदमी अपनी रूह को पवित्र करने के साथ अपनी दुनियादारी की हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में समर्पित हो जाता है. अमूमन साल में ग्यारह महीने तक इंसान दुनियादारी के झंझावतों में फंसा रहता है. लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय किया है.
शाहनवाज अहमद ने कहा कि रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना नहीं है बल्कि रोजे की रूह दरअसल आत्म संयम, नियंत्रण, अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने के संकल्प और उस पर मुस्तैदी से अमल में बसती है.
सवालों का सिलसिला लगातार जारी
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर सोमवार को सवाल और जवाब का सिलसिला जारी रहा. लोगों ने नमाज, रोजा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए.
सवाल : रोजे की हालत में गुस्ल (नहाना) करने में अगर कान में पानी चला जाए तो क्या रोजा टूट जाता है?
जवाब : रोजे की हालत में अगर गुस्ल करते हुए कान में खुद ब खुद पानी चला गया तो रोजे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, इसलिए कि यह इख्तियार से बाहर है. उलमा-ए-किराम ने कहा कि नक्सीर फूट गई और खून हलक में चला गया तो रोजा टूट जाएगा
सवाल : नापाकी की हालत में रोजा रखना कैसा है?
जवाब : हालते जनाबत में रोजा दुरुस्त है. इससे रोजे में कोई नक्स व खलल नहीं आएगा. अलबत्ता वह शख्स नमाजें जानबूझकर छोड़ने के सबब अशद गुनाहे कबीरा का मुरतकिब होगा.
सवाल : क्या दांत और मसूड़े से खून निकले तो रोजा टूट जाएगा?
जवाब : दांतों या मसूड़ों से खून निकलकर हलक में चला जाए तो उससे रोजा टूट जाएगा और कजा लाजिम होगी.
सवाल : रोजे की हालत में नक्सीर फूट गई और खून हलक में चला गया तो क्या रोजा टूट गया?
जवाब : अगर किसी की नक्सीर फूट गई और खून हलक में चला गया तो रोजा टूट जाएगा और खून हलक में नहीं गया तो रोजा नहीं टूटेगा.
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Source: IOCL



























