गोरखपुर: नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर समारोह, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने दिया संस्कृति और परंपरा का संदेश
Gorakhpur News In Hindi: भारतीय नूतन वर्षाभिनन्दन समारोह आयोजन समिति द्वारा भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर नौका विहार तारामंडल पर भारतीय नूतन वर्षाभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बुधवार को भारतीय नूतन वर्षाभिनन्दन समारोह आयोजन समिति द्वारा भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर नौका विहार तारामंडल पर भारतीय नूतन वर्षाभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. के. पी. कुशवाहा, प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम में संस्कार भारती के कलाकारों, सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग व अन्य बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानि कल आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना इन दोनों की जनता उगादि का पर्व उल्लास मनाती है. हमारे जितने त्यौहार बने हैं, सब उल्लासपूर्वक मनाते हैं जिसका उदाहरण होली है. जो अभी हाल ही में बीता है. एक ऋतु जाती है. दूसरी ऋतु आती है. यह भारतीय नववर्ष के अनुसार ही होती है.
कैलेंडर वर्ष से किसी को अपने जन्म कुंडली की जानकारी नहीं होती है. जन्म कुंडली की जानकारी हिंदी तिथि के अनुसार यानि पंचांग के आधार पर होती है. कुंडली की गणना उस समय कौन से ग्रह कार्य कर रहे थे. ग्रहों के प्रभाव के आधार पर होती है. पुरातन समय में युद्ध होते थे, तो हिंदी तिथियों के आधार पर आयोजित कर युद्ध को लड़ा जाता था.
अयोध्या में राममंदिर को बताया महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों का सौभाग्य कि रामनवमी के मानने के साथ-साथ हमको कुछ खटकता था और तब हम यह सोचते थे कि वास्तव में राम अयोध्या में कब पधारेंगे. दीपावली पर दीप जलते थे. क्योंकि भगवान श्रीराम लंका विजय करके आए हैं, लेकिन अपने राम को अयोध्या में ही नहीं पाते थे. आज राम अयोध्या में विराजमान हो चुके हैं. आज उत्साह के साथ लोगों को अयोध्या आकर्षित कर रही है. अयोध्या के पर्यटन के आधार पर एक राम के नाते पूरे भारतवर्ष से राम मंदिर में जितने लोग आकर करके दर्शन करके गए हैं. वह लाखों में नहीं है बल्कि करोड़ों करोड़ों लोग आ करके राम का दर्शन कर रहे हैं.
नया वर्ष नहीं सांस्कृतिक और अध्यात्म का संदेश
आगे उन्होंने कहा कि यह नूतन वर्ष केवल नया वर्ष नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देता है. महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी या युगादि, कश्मीर में नवरेह, सिंधी समुदाय में चेटीचंड तथा मणिपुर में साजिबू चेइरा ओबा के रूप में इसे उल्लासपूर्वक मनाया जाता है. कल युगादि पूरे उत्सव के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नव संवत्सर के रूप में मनाया जाएगा. मुझे भी एक सौभाग्य मिलने जा रहा है 28 तारीख को भद्राचलम में भगवान श्रीराम का पट्ट अभिषेक करने का काम मुझे करना है.
आयोजन हिन्दू जागरण का संदेश
राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन हिंदू जागरण का संदेश देता है. आज मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि गोरखपुर महानगर में पूर्व संध्या पर इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन संघ परिवार कर रहा हैं. यह आगे बढ़ेगा और आगे बढ़कर निश्चित रूप से भारतीय नववर्ष को मंगल बनाएगा. हम कोई त्यौहार मना रहे हैं तो हिंदू परंपरा के अनुसार मानना होगा. हर कार्यक्रम के साथ उत्साह जुड़ा हुआ है. बसंत के ऋतु के साथ-साथ नई कोपले आ जाती है. वह संदेश देती है कि हम नए वर्ष की तरफ बढ़ रहे हैं. वह संदेश देती है कि हम नूतनता को लेकर के आ रहे है.
पतझड़ आता है. पतझड़ पूरा हो जाता है. स्वाभाविक रूप से जरा यह सोचिए, यही है. हमारे शास्त्रों के अनुसार दिए की प्रकृति भी पुरातन चीजों को पूरी तौर पर समाप्त करती है. नवीनता को ग्रहण करती है. प्रकृति में परिवर्तन आता ही आता है. आप सभी अपने नववर्ष से जुड़े और चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा को नववर्ष मनाया ऐसा आग्रह है. आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने अपनी बात समाप्त की.
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही भारतीय नववर्ष
कार्यक्रम की प्रस्ताविकी रखते हुए प्रांत प्रचारक रमेश ने कहा कि जब सारी रचनाए भारतीय काल गणना पंचांग से होती है. उसी से भारतीय सारे पर्व मनाते हैं. चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा को ही भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ होता है. क्योंकि आज ही के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी. राजा विक्रमादित्य का राज्य अभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही हुआ है. ऐसे महत्वपूर्ण दिन को गोरखपुर के सभी लोगों एक साथ में इस प्रकार के कार्यक्रम को आयोजित करने का जो निर्णय लिया है. समाज के साथ मिलकर भारतीय नववर्ष के अवसर पर इस प्रकार का आयोजन कर रहे है. यह लोक परंपरा, लोक आस्था और लोक संस्कृति का पर्व है.
भारतीय नूतन वर्ष भारतीय नूतन वर्ष की जितनी स्वीकारता बढ़ेगी ग्राहता बढ़ेगी उतनी ही भारतीय परंपरा संस्कृति और संस्कार मजबूत होंगे. भारतीय परंपरा भारतीय संस्कृति की जड़े जितनी मजबूत होगी उतनी ही भारत मजबूत होगा. भारत की पहचान परंपरा और मूल्यों से होती है. यह परंपराएं और मूल्य जब तक जीवित रहेंगे,भारत मजबूर रहेगा.
आज जब पूरा विश्व युद्ध की दौर से गुजर रहा है, विश्व के अधिकांश देश एक दूसरे की कटुता में झुलस रहे हो. तब सब की दृष्टि स्वाभाविक रूप से भारत की ओर जाती है. भारत की उन परंपराओं की ओर जाती है. भारत के संस्कारों की ओर जाती है. क्योंकि भारत की यह संस्कार भारत के परंपराएं ही युद्ध से शांति की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है. विश्व को मानवता की राह पर ले जाने के लिए कटिबद्ध होती है. भारतीय नूतन वर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो.
कार्यक्रम में मंच पर अतिथियों के साथ प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल, आयोजन समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मृति मल्ल ने और आभार ज्ञापन आयोजन समिति के मंत्री मनीष जैन ने किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान और भारत माता की आरती के साथ हुआ.
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विभाग प्रचारक अजय, रामनाथ गुप्ता, हरे कृष्ण सिंह, अभयनंदन त्रिपाठी, प्रभात राय, डॉ. वाई सिंह, चारू चौधरी, प्रो. शरद मिश्र, हरमीत सिंह, आत्मा सिंह, अरुण मल्ल, जिला प्रचारक मनीष, अभिषेक चटर्जी, डॉ स्मृति मल्ल, बृजेश राम त्रिपाठी, दीपक कारीवाल, आदर्श चौधरी, अजीता पाण्डेय, अनन्य, करुणेश पाण्डेय, आनन्द जालान, संतोष शुक्ल, मुकेश गोंड, नंद किशोर, प्रांजल त्रिपाठी, पल्लव गुप्ता, विकास पांडेय, डॉ. रुचिका अग्रवाल,अभय सिंह, समीक्षक रमानी, अखिलेश दुबे, स्वतंत्र, अभिषेक पाण्डेय, पद्माकर, पुनीत पांडेय आदि उपस्थित रहे.
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