गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव: BJP-SP के बीच निर्दलीय ने बढ़ाई चुनौती
यूपी में विधान परिषद चुनाव के नतीजे आज शाम तक आ जाएंगे. सबसे ज्यादा निगाहें गोरखपुर-फैजाबाद MLC सीट पर लगी हुई है. यहां मुकाबला त्रिकोणीय बताया जा रहा है.

राजनीति के गलियारे में एमएलसी चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. शिक्षक एमएलसी चुनाव की सभी 11 सीटों पर कड़ा मुकाबला है. हालांकि सबसे रोचक मुकाबला गोरखपुर फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन 2026 के चुनाव में देखने को मिल रहा है.
मतगणना का काउंटडाउन शुरू हो गया है. मतगणना शुरू होने में 10 घंटे से भी कम समय बचा है. ऐसे में सीट पर सबसे रोचक त्रिकोणीय मुकाबला लोगों का ध्यान खींच रहा है. इस त्रिकोणीय मुकाबले में किसका विजय तिलक होगा? और किसकी हार होगी? हालांकि एक निर्दल प्रत्याशी की ढाई चाल ने भाजपा-सपा प्रत्याशियों की जीत की राह में रोड़ा बनकर मुश्किलें खड़ी कर दी है.
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16 उम्मीदवारों की किस्मत का होगा फैसला
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन 2026 के चुनाव में कुल 16 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतपेटियों में बंद है. भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी नामांकन के समय से ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. वे इसके पहले लगातार तीन बार चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं. शिक्षकों के शर्मा गुट का उन्हें समर्थन मिलता रहा है. वह शर्मा गुट व खेमे के माने जाते हैं. यही वजह है कि उनकी दावेदारी सबसे अधिक मजबूत मानी जा रही है. क्योंकि डॉ संजय त्रिपाठी का टिकट काटने के बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व में ध्रुव कुमार त्रिपाठी के ऊपर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दे दिया.
हालांकि भाजपा के 6 साल से समर्पित कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी को उनका टिकट कटना रास नहीं आया. यही वजह है कि उन्होंने बागी तेवर दिखाते हुए निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया. इसके बाद उन्होंने भावुक होते हुए भाजपा का झंडा अपनी गाड़ी से निकाल दिया. उनका भावुक होना सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भा गया. उन्होंने इसे राजनीतिक हथकंडा बनाते हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी घोषित करने के लिए घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव को मान-मनौव्वल के बाद बैठा दिया.
अपने ही घर में बेगाने हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी को भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का हाथ बढ़ाना ऐसे रास आया जैसे उनकी दु:खती रग पर किसी ने मरहम लगा दिया हो.अपने भविष्य के कमल का फूल मुरझाता हुआ देखकर डा. संजयन त्रिपाठी भी झट से साइकिल पर सवार हो गए और सपा के प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कर दिए. सभी 17 जिलों में जमकर प्रचार भी हुआ.
सपा-भाजपा में कांटे की टक्कर
हालांकि भाजपा और सपा दोनों ब्राह्मण प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में उतरने से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से गड़बड़ा गया है. ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी की शिक्षकों में अच्छी पैठ है और वह उनके मुद्दों को लगातार सदन में उठाते रहे हैं. लेकिन 18 साल से लगातार शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहाली सहित अन्य मांगों के पूरा नहीं होने से एक खेमा उनसे नाराज भी दिख रहा है. वहीं दूसरी ओर सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी 'नवल्स अकादमी समूह' के अध्यक्ष (Chairman of Navals Academy Group) हैं.
इसके अलावा वह 'गोरखपुर सहोदय स्कूल्स एसोसिएशन' व 'स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक महासभा, गोरखपुर' जैसे संगठनों से जुड़े हुए हैं और उन्हें इन संगठनों का पूरा समर्थन प्राप्त है. इसी नाते माना जा रहा है कि वह भी मजबूत स्थिति में हैं. इसके साथ ही सपा प्रत्याशी होने की वजह से अल्पसंख्यक शिक्षकों का वोट भी उनके खाते में जाने की संभावना है. हालांकि भाजपा और सपा दोनों ही पार्टियों द्वारा ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में उतरने की वजह से दोनों के वोट बराबर बंट जाने का कयास राजनीतिक विश्लेषक लगा रहे हैं.
अजय सिंह बना रहे त्रिकोणीय मुकाबला
वही त्रिकोणीय मुकाबले की इस लड़ाई के केंद्र में सबसे मजबूत कड़ी के रूप में पिछली बार इसी सीट पर रनरअप रहे अजय सिंह को माना जा रहा है. क्योंकि अजय सिंह एक निर्दलीय (Independent) प्रत्याशी के रूप में यह चुनाव लड़ रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा से जुड़े रहे हैं और पिछले चुनाव में भी इसी क्षेत्र से दूसरे स्थान पर रहे थे. वे आजमगढ़ जनपद के क्षत्रिय हैं. वही वित्तविहीन शिक्षकों में उनकी गहरी पैठ है. उनकी मजबूत स्थिति की एक वजह यह भी है कि एमएलसी चुनाव में आजमगढ़ सर्वाधिक मतों वाला जनपद है. जबकि गोरखपुर मतों के लिहाज से दूसरे स्थान पर है.
हालांकि इसके अलावा अन्य प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं. इनमें राजीव यादव और डॉ. राकेश सिंह (उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ - चेतनारायण गुट) सहित कुल 16 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. एमएलसी चुनाव में सभी 16 प्रत्याशी दमदारी के साथ अपने चुनाव जीतने को लेकर आश्वस्त हैं. ऐसे में देखना यह होगा कि त्रिकोणीय मुकाबले में जीत का ताज किसके सिर पर सजता है और किसके मस्तक पर विजय तिलक चमकता है.
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