30 मरीजों का ऑपरेशन करना पड़ा भारी, फैल गया इंफेक्शन, 9 की निकालनी पड़ीं आंखें!
Gorakhpur News: गोरखपुर में एक निजी अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 18 मरीजों की हालत बिगड़ गई और मरीजों की आंखों मं इन्फ़ेक्शन हो गया. जिसके चलते उनकी आँख निकालनी पड़ी.

यूपी के गोरखपुर में न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में 19 दिन पहले 30 मरीजों का कैंप में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था. लेकिन, ऑपरेशन के 24 घंटे के अंदर ही मरीजों की आंख में संक्रमण हो गया, जिसकी वजह से कई मरीजों की हालत बिगड़ गई और उनकी आँख तक निकालनी पड़ी है. डीएम ने इस मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं. वहीं अखिलेश यादव ने इस लेकर सरकार पर निशाना साधा.
ख़बर के मुताबिक सिकरीगंज में न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में 1 फरवरी को मोतियाबिंद के ऑपरेशन का कैंप लगा था. इस कैंप में 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया लेकिन 24 घंटे में इनमें से 18 मरीजों की हालत बिगड़ गई. उनकी आंखों में संक्रमण हो गया. जिसकी वजह से उन्हें दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों में भर्ती कराया गया.
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद निकालनी पड़ी आंखें
3 फरवरी को ही डीएम दीपक मीणा ने न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल द्वारा किए गए ऑपरेशन को लेकर जांच कमेटी का गठन कर दिया. इस जांच में मरीजों की आंखों में गंभीर बैक्टीरीयल इंफेक्शन होने की बात सामने आई है. वहीं दूसरी तरफ़ इस घटना के बाद कोहराम मच गया है. मरीजों के परिजनों ने अस्पताल को सीज करने की माँग की है.
कैंप में ऑपरेशन कराने वाले मरीज़ अर्जुन के भाई नागेन्द्र सिंह ने बताया कि ऑपरेशन के बाद अर्जुन की आँख में इंफ़ेक्शन हो गया और उसकी आँख से ख़ून निकलने लगा. जिसकी वजह से उसकी आँख निकालनी पड़ी है. बारी गांव के दीपू की बड़ी मम्मी का भी यहां ऑपरेशन हुआ था लेकिन तीसरे दिन ही उनकी आँख भी निकालनी पड़ी.
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
इस घटना पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रशासन पर सवाल उठाए. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा- 'गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी छिन रही है और कोई चैन से बैठकर गाल बजा रहा है. मुख्यमंत्री जी जब गोरखपुर आते हैं, तो क्या और कोई भी देखभाल या हिसाब’किताब करते हैं या फिर केवल जोड़-गांठ के चले जाते हैं. इस बार जनता इन्हें गोरखपुर भी हराएगी और बताएगी कि चिराग तले अंधेरा कैसे होता है.'
रही बात स्वास्थ्य मंत्री जी की तो ये समझ लेना चाहिए कि वो खुद और उनका विभाग 'हाता नहीं भाता' की मुख्य-नीति के विस्तार के कारण, उन्हीं की तरह उपेक्षित है. अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उनसे विभाग छीनने का आधार बनाया जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की ऐसी दुर्गति देखकर हर कोई ये सहज रूप से स्वीकार भी कर लेगा कि सच में स्वास्थ्य मंत्री महोदय की लापरवाही और कमीशनखोरी की वजह से प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की इतनी दुर्दशा हुई है.
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Source: IOCL
























