Rudraprayag News: रुद्रप्रयाग के छात्रों को तोहफा, अब बीएससी या बीसीए के लिए नहीं जाना पड़ेगा श्रीनगर और देहरादून
Rudraprayag News: रुद्रप्रयाग में साइंस की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी हैं, अब यहां के राजकीय महाविद्यालय में ही ग्रेजुएशन लेवल की साइंस की पढ़ाई करवाई जाएगी.

Rudraprayag News: रुद्रप्रयाग में साइंस की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी है. अब उन्हें स्नातक स्तर पर साइंस की पढ़ाई के लिए श्रीनगर या देहरादून जैसे शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. रुद्रप्रयाग के राजकीय महाविद्यालय में ही ग्रेजुएशन लेवल की साइंस की पढ़ाई करवाई जाएगीं. इसके लिए कॉलेज प्रबंधन की और से नई प्रवेश प्रक्रियां की भी शुरुआत होने जा रही हैं. इससे रुद्रप्रयाग के छात्रों को बहुत फायदा मिलेगा.
फिलहाल पुरानी इमारत से होगा संचालन
दरअसल रुद्रप्रयाग में साल 2006 में बीबीए, बीसीए और बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम के साथ शुरू महाविद्यालय की शुरुआत हुई थी. इस महाविद्यालय का संचालन पहले आईटीआई के छात्रावास में किया गया, लेकिन डेढ दशक गुजर जाने के बाद भी रुद्रप्रयाग डिग्री कॉलेज को अपना कैंपस नहीं मिल पाया है. इन दिनों इसका संचालन राजकीय बालिका इंटर काॅलेज के पुराने भवन से किया जा रहा है, जहां पर छात्रों के लिए व्यवस्थाएं काफी कम हैं. ऐसे में बीएससी की कक्षाएं संचालित करने में महाविद्यालय प्रबंधन को और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.
महाविद्यालय ने शुरू की फॉर्म की बिक्री
शासन स्तर पर यहां भौतिकी रसायन, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और गणित विषय का संचालन करने की मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन ने विज्ञान वर्ग में प्रवेश के लिए आवेदन फॉर्म की बिक्री भी शुरू हो गई हैं. कई छात्रों ने इसके फॉर्म भी खरीद लिए हैं. इस फॉर्म की बिक्री की आखिरी तारीख 6 जनवरी है. छात्र इसे लेकर काफी उत्साहित महसूस कर रहे हैं. इस महाविद्यालय की शुरुआत के साथ ही जिले के बच्छाणस्यूं, तल्लानागपुर, धनपुर, रानीगढ़ पट्टी गावों के छात्रों को फायदा मिलेगा.
रुद्रप्रयाग महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डीएस चौहान ने कहा कि उन्होंने छात्र हितों को देखते हुए बीएससी की कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया है. इसे मान्यता तो बहुत पहले ही मिल गई थी लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पाठ्यक्रम को शुरू नहीं किया जा सका. लेकिन क्षेत्रीय विधायक और छात्र संघ पदाधिकारियों ने संसाधन जुटाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद इसका निर्णय लिया गया.
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Source: IOCL






















