गाजीपुर: स्कूलों की लापरवाही से खतरे में बच्चों की जान, 165 वाहन तय उम्र पार, 688 का फिटनेस फेल
Ghazipur News:. यात्री कर अधिकारी लव कुमार सिंह ने बताया कि जिले में 165 स्कूली वाहन अपनी 15 साल की समयावधि पूरी कर चुके हैं, जो सड़क पर चलने के लिए पूरी तरह से अनफिट हैं.

यूपी के गाजीपुर में प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही और मनमानी बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है. जी हां जिले की सड़कों पर 165 स्कूली वाहन ऐसे हैं, जो 15 साल की आयु पूरी कर चुके हैं और 688 वाहनों का फिटनेस और परमिट भी फेल हो चुका है. बावजूद इसके ये वाहन CBSE, ICSE और यूपी बोर्ड के स्कूलों द्वारा रोजाना छात्रों को घर से स्कूल और स्कूल से घर लाने-ले जाने में इस्तेमाल हो रहे हैं. स्कूल प्रबंधन इनके बदले मोटा किराया भी वसूल रहे हैं.
एआरटीओ विभाग ने कई बार नोटिस जारी करने के बाद अब जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है. जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्कूलों को नोटिस जारी कर मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी है.
बता दें कि गाजीपुर में प्राइवेट स्कूलों द्वारा संचालित स्कूली बसों और वाहनों की स्थिति चिंताजनक है. यात्री कर अधिकारी लव कुमार सिंह ने बताया कि जिले में 165 स्कूली वाहन अपनी 15 साल की समयावधि पूरी कर चुके हैं, जो सड़क पर चलने के लिए पूरी तरह से अनफिट हैं. इसके अलावा 688 वाहनों का फिटनेस और परमिट नियमों के विपरीत है. फिर भी ये वाहन बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे बच्चों की जान को गंभीर खतरा है.
एआरटीओ और DIOS की कार्रवाई
एआरटीओ विभाग ने स्कूल प्रबंधनों को कई बार नोटिस जारी किए लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद अब एआरटीओ ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की. जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह ने बताया कि एआरटीओ विभाग से पत्र मिला था, जिसमें स्कूली वाहनों के फिटनेस और परमिट की अनियमितताओं का जिक्र था. हमने सभी प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि फिटनेस और परमिट के नियमों का पालन नहीं किया गया, तो उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी.
स्कूलों की मनमानी
- पुराने वाहन: 165 स्कूली वाहन 15 साल से अधिक पुराने हैं, जो यातायात नियमों के तहत सड़क पर चलने के लिए अयोग्य हैं.
- फिटनेस और परमिट फेल: 688 वाहनों का फिटनेस और परमिट मानकों को पूरा नहीं करता, फिर भी ये वाहन बेरोकटोक चल रहे हैं.
- मोटा किराया: स्कूल प्रबंधन बच्चों से वाहन के लिए मोटा किराया वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं देते.
- लापरवाही का नतीजा: पुराने और अनफिट वाहनों के कारण बच्चों की जान को हर दिन खतरा बना हुआ है.
प्रशासन की सख्ती
एआरटीओ विभाग ने चेतावनी दी है कि जल्द ही इन वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी.लव कुमार सिंह ने कहा कि हम नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाएंगे और दोषी स्कूलों पर कार्रवाई करेंगे.
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