'ऐसे लोगों पर मुकदमा...' शस्त्र लाइसेंस मामले पर बोले अफजाल अंसारी
Afzal Ansari News: शस्त्र लाइसेंस मामले पर अफजाल अंसारी ने कहा है कि गाजीपुर पुलिस ने जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है, उनके बारे में पता भी नहीं किया कि वह जिंदा या नहीं.

गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी पर पिछले महीने शस्त्र लाइसेंस के मामले में एक-एक कर तीन मुकदमे दर्ज किए गए, साथ ही तत्कालीन शस्त्र लिपिक और अन्य को सहअभियुक्त बनाया गया. वहीं अब इस मामले में गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी ने बड़ा खुलासा किया है. अफजाल अंसारी ने कहा है कि गाजीपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए यह भी नहीं ध्यान दिया, जिनके खिलाफ वो मुकदमा दर्ज कर रहे हैं, वह अब इस दुनिया में है भी या नहीं. उन्होंने बताया कि तीन मुकदमों में करीब 5 ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जो अब इस दुनिया में नहीं है.
उन्होंने शस्त्र लाइसेंस के मामले में कहा कि, "हमारा वेलकम किया जा रहा था उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री जी के सचिवालय से कुछ ऐसा प्रस्ताव था की कुछ ऐसा सौगात दो कि मुख्यमंत्री जी आनन फानन में कुछ सौगात दे और सौगात के रूप में हमारे ऊपर मुकदमा दिया गया और इसलिए की सबसे बड़ा कांटा निकाल दिया जाए अफजाल अंसारी को ऐसा बंद कर दिया जाए कि चुनाव भर बाहर ना निकल सके."
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जिन लोगों पर मुकदमा, उनका हो चुका निधन
उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 25 जुलाई और 27 जुलाई को एक ही मामले में मुकदमा दर्ज किया गया, सभी में आरोप एक ही हमारे साथ पांच लोगों को सह अभियुक्त भी बनाया गया. पहले मुकदमे में दो अभियुक्त जिसमें दोनों स्वर्ग में हैं, दूसरे मुकदमे में भी 2 सह अभियुक्त दोनों स्वर्ग में हैं, तीसरी मुकदमे में भी अभियुक्त अब स्वर्ग में है.
उन्होंने कहा कि भारत की कानून यह व्यवस्था है कि किसी के खिलाफ भी मुकदमा है, चार्टशीट भी है और कोर्ट में ट्रायल भी चल रहा है और कोर्ट को बताया जाता है कि अब वह व्यक्ति अब इस दुनिया में नहीं है. तब कोर्ट भी उस फाइल को बंद कर देती है. यहां तो मुर्दे के खिलाफ मुकदमा लिखा जा रहा है.
जहां से खरीदी राइफल, वहां लग गई थी आग- अफजाल अंसारी
उन्होंने बताया कि मुकदमा किया गया है कि 83 से 87 के बीच में राइफल खरीदी गई बेची गई लेकिन उसका रिकॉर्ड कहां है, वह मिल नहीं रहा है जिसमें एक राइफल अरुणाचल प्रदेश में बेची गई थी और वहीं से दूसरी खरीदी गई थी और खरीद बिक्री का सत्यापन के लिए जब टीम अरुणाचल प्रदेश गई लेकिन जिस फर्म से खरीद बिक्री दिखाया गया उस फर्म के मालिक ने लिख कर दिया कि 2001 में उसके मार्केट में आग लगी थी सारे रिकॉर्ड जल गए थे मेरे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है.
अफजाल अंसारी के मुताबिक, "उस घटना की तस्दीक खुद सिटी मजिस्ट्रेट ने की. उस वक्त एक दो नहीं 65 दुकानें जलकर खाक हुई थी, और अब यह लोग जांच करने गए हैं तो वहां पर अफजाल अंसारी फायर ब्रिगेड का कर्मचारी है क्या कि वह बताया कि हमें यहां पर बंदूक खरीदें और बेचे हैं तो इसलिए इस दुकान में हम फायर ब्रिगेड की मशीन लेकर खड़े रहेंगे."
गाजीपुर एसपी पर अफजाल का तंज
उन्होंने गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक पर तंज करते हुए कहा कि उस वक्त यह लोग पुलिस में भर्ती भी नहीं रहे होंगे लोग उस समय के कहानी को गढ़ करके हमारे खिलाफ हमारे हौसले को तोड़ने के लिए और खौफ का वातावरण बनाने के लिए प्रयास किया गया देश में कानून का राज है हाई कोर्ट में जब पूरे मामले पर डिस्कस हुई तो धज्जी उड़ गई इस दौरान उन्होंने कहा कि उस लाइसेंस का रखवाला या कस्टोडियन में नहीं बल्कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट
मृत हो चुके लोगों पर मुकदमा दर्ज किए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह सोचा था कि उन लोगों का बयान लिखकर मामले को निपटा दिया जाएगा लेकिन मुकदमा दर्ज करते वक्त उन्हें पता ही नहीं था कि वह सभी लोग मर चुके हैं लेकिन जब अब पुष्ट हो गया और डेथ सर्टिफिकेट मिल गया है.
उन्होंने फिर से तंज करते हुए कहा कि जिस वक्त का मामला है उस वक्त वह पुलिस में भर्ती ही नहीं रहे होंगे पता नहीं आठ में पढ़ते रहे होंगे या हाई स्कूल भी पास नहीं किया रहे होंगे उन्होंने कहा कि योगी सरकार और उनकी मशीनरी को यह डर लगता है कि गाजीपुर में हालात अगर पार्टी की हालत पतली है तो उसका सबसे बड़ा कांटा वह अफजाल अंसारी को मानते हैं.


















