गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में बवाल, बर्खास्त हुए कुलसचिव करेंगे कोर्ट का रुख, कहा- 'बदले की भावना...'
Greater Noida News: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के बर्खास्त कुलसचिव डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि वह इस पद के लिए पूरी तरह योग्य हैं और उन्हें जानबूझकर इस पद से हटाया गया है.

- विश्वविद्यालय में फीस घोटाले और फर्जी रसीदों की शिकायतें.
ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के कुलसचिव विश्वास त्रिपाठी को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है. विश्वास त्रिपाठी ने फैसले का विरोध किया है और मामले को कोर्ट ले जाने की बात कही है. अधिकारियों ने जानकारी दी कि उन्होंने इस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता पूरी नहीं करने के कारण बर्खास्त कर दिया गया है. प्रभारी कुलसचिव प्रो. चंद्र कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. त्रिपाठी ने आवश्यक न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद इस पद के लिए आवेदन किया था.
उन्होंने कहा कि दस्तावेज परीक्षण समिति (DVC) ने जांच के दौरान पाया कि डॉ. त्रिपाठी ने अपने अनुभव से संबंधित तथ्यों को भ्रामक और अपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया था. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड ने अभिलेखों की जांच और डॉ. त्रिपाठी का पक्ष व्यक्तिगत रूप से सुनने के बाद पाया कि उनकी नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है. इसके बाद उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया.
बर्खास्त कुलसचिव ने किया फैसले का विरोध
इस बीच, डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि वह इस पद के लिए पूरी तरह योग्य हैं और उन्हें जानबूझकर इस पद से हटाया गया है. यह फैसला बदले की भावना से लिया गया है क्योंकि उन्होंने कुलपति के खिलाफ हाई कोर्ट अवमानना याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि वह इस मामले को कोर्ट लेकर जायेंगे. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ जो वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया गया है, वह भी उन्हें परेशान करने के लिए जानबूझकर बदले की भावना किया गया है.
क्या है पूरा मामला?
गौर हो कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में फीस घोटाले के आरोप सामने आये थे. विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर बोर्ड को भी फीस को लेकर कई शिकायतें मिली हैं. छात्रों का आरोप है कि नकद में फीस लेने के बाद उन्हें विश्वविद्यालय की मोहर लगी फर्जी रसीद दी गई. छात्रों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग और विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ छात्र, जूनियर छात्रों को फीस कम कराने का झांसा देकर उनसे नकद पैसे ले लेते थे, लेकिन विश्वविद्यालय के खाते में जमा ही नहीं होते थे. यह मामला तब सामने आया जब परीक्षा का समय आया, तो जिन छात्रों की फीस जमा नहीं दिखी उन्हें परिक्षा में बैठने से रोका गया.
इसके बाद ही छात्रों को पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. कुलपति प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने दिसंबर 2025 को डॉ. विश्वास त्रिपाठी को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी क दिया और उनपर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए. इस आदेश के खिलाफ त्रिपाठी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रूख किया. कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका पालन नहीं किया, जिसके बाद त्रिपाठी ने कुलपति के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस किया था.
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Source: IOCL


























