जौनपुर, कासगंज और बाराबंकी के जिलाधिकारियों ने अखिलेश यादव के इन आरोपों को बताया गलत
UP Politics: बाराबंकी, जौनपुर, कासगंज के जिलाधिकारियों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दावों का खंडन करते हुए बयान जारी किया है.

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जौनपुर, कासगंज और बाराबंकी में गड़बड़ियों के आरोपों का संबंधित जिलाधिकारियों ने मंगलवार को खंडन किया. तीनों जिलाधिकारियों ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर यादव के 17 अगस्त के ‘पोस्ट’ का हवाला देते हुए आरोपों के संबंध में उन्हें जवाब दिया. पोस्ट के तुरंत बाद यादव ने निर्वाचन आयोग पर फिर से पलटवार करते हुए कहा कि वह जिलाधिकारियों को आगे करके ‘‘बच नहीं सकता’’ और मामले की गहन जांच की जानी चाहिए.
कासगंज के जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यादव की पहले की गई पोस्ट का जवाब देते हुए कहा, 'ईमेल के माध्यम से जनपद कासगंज की विधान सभा 101 अमांपुर के अंतर्गत आठ मतदाताओं के नाम गलत ढंग से काटने की शिकायत प्राप्त हुयी थी. जांच में पाया गया कि सात मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दो बार होने के कारण नियमानुसार एक नाम को विलोपित किया गया था.'
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उन्होंने कहा, 'इन सात मतदाताओं का नाम आज भी मतदाता सूची में विद्यमान है. एक मतदाता की मृत्यु होने के कारण उनकी पत्नी के द्वारा फार्म- सात भरा गया था, जिसके आधार पर मृतक का नाम विलोपित किया गया था.'
इसी तरह, जौनपुर के जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने भी 'एक्स' पर लिखा, 'ईमेल के माध्यम से जनपद जौनपुर की विधान सभा 366 जौनपुर के अंतर्गत पांच मतदाताओं के नाम गलत ढंग से काटने की शिकायत प्राप्त हुयी थी. वर्णित सभी पांचों मतदाता 2022 के पूर्व ही मृतक हो चुके थे. इसकी पुष्टि संबंधित मृतक मतदाता के परिवार के सदस्यों, स्थानीय लोगों सहित स्थानीय सभासद के द्वारा की गयी थी. मृतकों के नाम नियमानुसार विलोपित किये गए हैं. अतः उपर्युक्त वर्णित शिकायत पूरी तरह निराधार व भ्रामक है.'
इस बीच, बाराबंकी के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने भी सपा प्रमुख की पोस्ट का जवाब देते हुए 'एक्स' पर कहा, 'बाराबंकी जिले के विधानसभा क्षेत्र 266-कुर्सी के दो मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गलत ढंग से काट दिये जाने के संबंध में प्राप्त हुए. जांच में पाया गया कि उपर्युक्त दोनों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं.' तीनों जिलाधिकारियों ने अपने जवाबों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पोस्ट का हवाला भी दिया.
निर्वाचन आयोग खुद को बचा नहीं सकता...
जिलाधिकारियों द्वारा ये ‘पोस्ट’ किए जाने के बाद सपा प्रमुख ने कहा कि जिलाधिकारियों को आगे करके निर्वाचन आयोग खुद को बचा नहीं सकता.
उन्होंने कहा, 'उप्र में 2022 के विधानसभा चुनावों में नाम काटने को लेकर हमने जो 18,000 शपथपत्र दिये थे, भाजपा सरकार उनमें से एक का भी जवाब सही तरीक़े से देना नहीं चाहती है. जिलाधिकारी को आगे करके निर्वाचन आयोग बच नहीं सकता. इस मामले की गहन जांच-पड़ताल हो. डीएम साहब दिखाएं कि नाम काटते समय जो ‘मृतक प्रमाणपत्र’ लगाए गये थे वे कहां हैं. अगर ये झूठ नहीं है तो ये सफ़ाई देने में इतने साल क्यों लग गये?'
सपा प्रमुख ने गत 17 अगस्त को आयोग से मांग की थी कि वह अपनी पार्टी को मिली डिजिटल रसीदों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने वाला एक हलफनामा जारी करे. उन्होंने अमांपुर, बख्शी का तालाब, जौनपुर सदर और कुर्सी निर्वाचन क्षेत्रों में 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों के संबंध में उनके द्वारा जमा किए गए हलफनामों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए.
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