धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर संत समाज में बहस, सलमान खान को 'देशद्रोही' कहने पर जताई नाराजगी
Haridwar News: धीरेंद्र शास्त्री के "वेदों को न मानने वाले जावेद-नावेद बनेंगे" बयान पर संतों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है. वहीं, सलमान खान को 'देशद्रोही' कहने पर संत समाज ने तीखी आपत्ति जताई.

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उस हालिया बयान ने संत समाज में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि "वेदों को न मानने वालों के बच्चे जावेद-नावेद बनेंगे." इस बयान और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह द्वारा अभिनेता सलमान खान को 'देशद्रोही' कहे जाने पर हरिद्वार के प्रमुख संतों ने अपनी महत्वपूर्ण राय रखी है.
श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वेदों को मानने वालों का व्यवहार और संस्कार अलग होते हैं. उन्होंने जोर दिया कि वेद सभी धर्मों की जड़ हैं और यदि इनके संस्कार सभी को मिलें, तो समाज मजबूत होगा. हालांकि, संतों के एक वर्ग का मानना है कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहाँ हर किसी को अपनी आस्था के अनुसार शिक्षा लेने का अधिकार है. यदि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी नीति बनाए जिसमें सभी शास्त्रों का अध्ययन 'विद्यार्थी भाव' से हो, तो देश का भविष्य स्वर्णिम होगा.
'जावेद-नावेद' टिप्पणी पर समर्थन और सुझाव
बड़ा उदासीन अखाड़ा के सचिव महंत सूर्य मुनि ने धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग अपने शास्त्रों से दूर होते हैं, वे मार्ग से भटक सकते हैं. वहीं, निर्मल अखाड़ा के जसवीर कोठारी ने भी धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता को जरूरी बताया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा और आस्था निजी विषय हैं.
सलमान खान को 'देशद्रोही' बताने पर तीखा विरोध
यूपी सरकार के मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह द्वारा सलमान खान के खिलाफ की गई टिप्पणी पर संत समाज ने एकजुट होकर आपत्ति जताई है.
महंत रवींद्र पुरी ने इसे 'संवैधानिक मर्यादा' के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस कारण या प्रमाण के किसी को देशद्रोही कहना पूरी तरह गलत है. महंत सूर्य मुनि ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में मुसलमान देशभक्त हैं. जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को ऐसे विवादित बयान देने से पहले संयम बरतना चाहिए और पूरी जांच करनी चाहिए.
हरिद्वार के संतों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जहाँ सनातन संस्कृति और वेदों का संरक्षण अनिवार्य है, वहीं किसी भी व्यक्ति पर बिना प्रमाण के देशद्रोही का ठप्पा लगाना सामाजिक सद्भाव के लिए घातक है.
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