देहरादून पुलिस ने सहारनपुर से विक्रम शर्मा हत्याकांड के आरोपी को दबोचा, 1 लाख रुपये का था इनाम
Dehradun News In Hindi: देहरादून पुलिस और स्वाट टीम ने हत्याकांड में तीन महीने से फरार चल रहे एक लाख के इनामी आरोपी को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है.

देहरादून पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने विक्रम शर्मा हत्याकांड में शामिल तीन महीने से फरार चल रहे 1 लाख के इनामी बदमाश को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आरोपी सहारपुर से गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, अभियुक्त की पहचान झारखंड के जमशेदपुर निवासी 23 वर्षीय यशराज सिंह के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने इस पूरे हत्याकांड की साजिश रचने में अहम भूमिका निभाई और अपने साथियों को फंडिंग भी की थी.
बताया गया कि 13 फरवरी 2026 को सिल्वर सिटी, राजपुर रोड स्थित एक जिम से बाहर निकलते समय अज्ञात हमलावरों ने विक्रम शर्मा को गोली मारकर हत्या कर दी थी. थाना डालनवाला में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच में सामने आया कि यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं थी, बल्कि झारखंड से आए बदमाशों की सुनियोजित साजिश थी. पुलिस ने पहले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था, लेकिन छह अन्य आरोपी लगातार फरार चल रहे थे.
नोएडा-दिल्ली में भी की थी हत्या की कोशिश
पूछताछ में यशराज ने खुलासा किया कि विशाल सिंह के कहने पर उसने अपने साथी आकाश प्रसाद, अंकित वर्मा, जितेंद्र साहू और मोहित उर्फ अक्षय ठाकुर के साथ मिलकर विक्रम शर्मा को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी. दिसंबर 2025 से पहले नोएडा और दिल्ली में भी विक्रम को मारने की कोशिश की गई थी, लेकिन भीड़भाड़ और उसके साथ लोगों के रहने के कारण वे सफल नहीं हो सके.
इसके बाद साथी अंकित वर्मा को कई बार देहरादून भेजकर विक्रम की दिनचर्या और आने-जाने के रास्तों की रैकी कराई गई. अंकित ने बताया कि विक्रम सुबह अकेले जिम जाता है, बस यही मौका था, जिसे अंजाम दिया गया.
UPI से की फंडिंग, पिता की स्कॉर्पियो से पहुंचे देहरादून
घटना की रात से पहले यशराज ने 12 फरवरी 2026 को अपने मोबाइल पर चल रहे पेटीएम से साथी आकाश प्रसाद को फ्लाइट टिकट के लिए करीब 15 हजार रुपये UPI से भेजे और रास्ते के खर्च के लिए 10 हजार रुपये अलग से दिए. आकाश के हरिद्वार में होटल में रुकने और खाने का खर्च भी यशराज ने UPI से चुकाया. हरिद्वार से किराये पर ली गई, स्कूटी और मोटरसाइकिल का भुगतान यशराज के पिता राजकुमार सिंह ने सारिका ट्रेडर्स के खाते से किया.
खुद यशराज की मां की तबीयत खराब होने के कारण वह देहरादून नहीं आ सका. विशाल और आशुतोष उसके पिता से स्कॉर्पियो की चाबी लेकर देहरादून पहुंचे और वहां पहले से मौजूद अंकित वर्मा तथा जितेंद्र साहू की मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया.
बुआ के घर पश्चिम बंगाल में छुपा
हत्या के अगले दिन जैसे ही विशाल ने यशराज को घटना की सूचना दी, वह, उसके पिता राजकुमार और साथी जितेंद्र साहू तीनों घर से फरार हो गए. पुलिस ने बाद में राजकुमार को झारखंड से गिरफ्तार किया, लेकिन यशराज अपनी बुआ के घर खड़गपुर, पश्चिम बंगाल पहुंच गया और महीनों वहीं छिपा रहा.
पुलिस ने सहारनपुर से किया गिरफ्तार
12 मई 2026 को वह अपने पिता के वकील से मिलने हरिद्वार आया और फिर कुछ अन्य वकीलों से सलाह लेने सहारनपुर पहुंचा. मुखबिर की सूचना पर देहरादून पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने रेलवे रोड स्थित होटल सूर्य लोक के सामने से उसे दबोच लिया.
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