देहरादून: डिजिटल अरेस्ट और निवेश के जाल में फंसे दो रिटायर्ड अफसर, 1.20 करोड़ रुपये की ठगी का हुए शिकार
Dehradun News: साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में देहरादून में साइबर अपराध के 92 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 10 डिजिटल अरेस्ट से जुड़े थे. 2026 में महज एक महीने में 11 मामले सामने आ चुके हैं.

देहरादून में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है. राजधानी में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और शेयर मार्केट निवेश के नाम पर दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों से कुल 1.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. दोनों ही मामले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कर लिए गए हैं और जांच जारी है.
पहला मामला अजबपुर कलां निवासी मंगल सिंह रावत से जुड़ा है, जो जल निगम से सेवानिवृत्त हैं. 21 नवंबर 2025 को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया. कॉलर ने कहा कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज है और यदि उन्होंने एनओसी नहीं ली तो उनका आधार और पैन कार्ड सीज कर दिया जाएगा.
इसके बाद पीड़ित को एक अन्य नंबर पर बात करने को कहा गया, जहां कॉल रिसीव करने वाले ने खुद को सीबीआई दिल्ली का अधिकारी बताया. ठग ने दावा किया कि बाराखंभा स्थित एक बैंक खाते से मंगल सिंह के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है और इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. लगातार धमकियों और दबाव के बीच 10 दिसंबर 2025 को ठगों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की बात कही.
अलग-अलग खातों में 64.65 लाख ट्रांसफर करवाए
गिरफ्तारी के डर से मंगल सिंह रावत ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 64.65 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब यह जानकारी उनके परिजनों को हुई तो ठगी का खुलासा हुआ और मामला साइबर पुलिस तक पहुंचा.
दूसरा मामला गोविंद नगर, ऋषिकेश निवासी राजीव साहनी का है, जो हिंदुस्तान नेशनल ग्लास लिमिटेड से सेवानिवृत्त हैं. 11 दिसंबर 2025 को उन्हें वाट्सएप कॉल के जरिए यतिन शाह नामक व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट का सीईओ बताया. भरोसा जीतने के बाद उसने शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा दिया.
राजीव साहनी ने भी 55.48 लाख ट्रांसफर कर दिए
16 दिसंबर 2025 से 28 जनवरी 2026 के बीच राजीव साहनी ने अलग-अलग खातों में कुल 55.48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब उन्होंने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने 25 लाख रुपये और जमा करने का दबाव बनाया. तभी उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
बीते वर्ष 92 मुकदमे दर्ज हुए
साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में देहरादून में साइबर अपराध के 92 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 10 डिजिटल अरेस्ट से जुड़े थे. वहीं वर्ष 2026 में महज एक महीने के भीतर 11 साइबर अपराध के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पांच डिजिटल अरेस्ट के हैं. पुलिस के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट के शिकार ज्यादातर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक हो रहे हैं.
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, निवेश ऑफर या पुलिस-सीबीआई के नाम पर आने वाली धमकी भरी कॉल से सतर्क रहें. ठगी का संदेह होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि शुरुआती 30 मिनट बेहद अहम होते हैं.
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Source: IOCL



























