देहरादून में क्यों मारा गया झारखंड का कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा? पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा
Vikram Sharma Murder Case: विक्रम शर्मा का जमशेदपुर में गणेश गिरोह से पुराना विवाद था. इसके अतिरिक्त ददई यादव और बड़ा निजाम गिरोह से भी उसकी गहरी दुश्मनी थी. जिस कारण वह देहरादून शिफ्ट हो गया.

झारखंड में कई संगीन आपराधिक मामलों में नामजद रहे कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा की हत्या ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या उसने देहरादून को आवश्यकता से अधिक सुरक्षित मान लिया था ? पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों ने स्वीकार किया है कि जमशेदपुर में उसकी हत्या करना अत्यंत कठिन था, इसलिए योजनाबद्ध तरीके से उसे देहरादून में निशाना बनाया गया.
सूत्रों के अनुसार विक्रम शर्मा का जमशेदपुर में गणेश गिरोह से पुराना विवाद था. इसके अतिरिक्त ददई यादव और बड़ा निजाम गिरोह से भी उसकी गहरी दुश्मनी थी. उस पर इन गिरोहों के सदस्यों की हत्या करवाने के आरोप भी लगते रहे हैं. लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए उसने जमशेदपुर छोड़कर देहरादून में अपना ठिकाना बना लिया था. यहां वह अमन विहार क्षेत्र में अपनी मां, पत्नी और बेटी के साथ रह रहा था.
सामान्य नागरिक की तरह रह रहा था विक्रम
देहरादून में वह एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत कर रहा था. वह समय-समय पर बाजपुर और नोएडा आता-जाता था, किंतु उसके आने-जाने की जानकारी बहुत सीमित लोगों को ही रहती थी. यहां तक कि उसके परिजनों को भी उसके कार्यक्रम की पूर्ण जानकारी नहीं होती थी. इसके विपरीत जमशेदपुर में वह दस से पंद्रह लोगों के काफिले के साथ चलता था और विशेष सतर्कता बरतता था. दून में उसने स्वयं को अपेक्षाकृत निश्चिंत कर लिया था.
शूटर्स ने लापरवाही का उठाया फायदा
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि साजिशकर्ताओं ने उसकी इसी बेपरवाही का लाभ उठाया. आरोपियों ने माना कि जमशेदपुर में कड़े सुरक्षा घेरे के कारण वारदात को अंजाम देना संभव नहीं था, इसलिए देहरादून में अवसर तलाशा गया. शांत और सुरक्षित माने जाने वाले शहर में विक्रम ने संभावित खतरे का सही आकलन नहीं किया, जो अंततः उसके लिए घातक सिद्ध हुआ.
पुलिस सत्यापन पर उठ रहे सवाल
विक्रम शर्मा कई वर्षों से अमन विहार में निवास कर रहा था, किंतु उसके पुलिस सत्यापन को लेकर भी प्रश्न उठे हैं. इस विषय में एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उस पर झारखंड में अनेक मामले दर्ज थे, हालांकि कई मामलों में वह दोषमुक्त भी हो चुका था. उत्तराखंड में उसके विरुद्ध एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं थी. देहरादून में वह बाजपुर की स्थानीय पहचान पत्र के आधार पर रह रहा था. सामान्यतः सत्यापन अभियान में राज्य के बाहर से आने वाले व्यक्तियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है.
वर्तमान में पुलिस संपूर्ण प्रकरण की गहन जांच कर रही है. हत्या की साजिश, निगरानी, स्थानीय सहयोग और अन्य पहलुओं की सूक्ष्म पड़ताल की जा रही है. इस घटना ने देहरादून जैसे शांत शहर में सुरक्षा व्यवस्था और सत्यापन प्रणाली पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है.
यह घटना दर्शाती है कि अपराध जगत में स्थान परिवर्तन से शत्रुता समाप्त नहीं होती. जिस शहर को विक्रम ने सुरक्षित आश्रय समझा, वही उसके जीवन का अंतिम ठिकाना बन गया.
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Source: IOCL



























