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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने तोड़ा उत्तराखंड की राजनीति का मिथक, बनाया ये खास रिकॉर्ड

Dehradun News: उत्तराखंड की राजनीति का मिथक तोड़ते हुए प्रदेश में सबसे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड पुष्कर सिंह धामी ने अपने नाम किया है. साल 2021 में सीएम पद की कमान संभाली थी.

Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजनीति में स्थायित्व लाने वाले पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी धामी पहले ऐसे बीजेपी मुख्यमंत्री है जो उत्तराखंड में सब से लंबे वक्त तक सीएम बनने का रिकॉर्ड कायम कर चुके है. बीजेपी कई सीएम अपना कार्यकाल पूरा नहीं पाए लेकिन सीएम धामी एक मात्र ऐसे मुख्यमंत्री है जिन्होंने इतना लंबा समय पूरा किया है. सीएम धामी ने जुलाई 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. सीएम पुष्कर सिंह धामी से पहले केवल कांग्रेस नेता एनडी तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे जो उत्तराखंड में पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए थे.

बता दें कि उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय तक अस्थिर नेतृत्व की गवाह रही है, जहां मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल अक्सर अधूरा ही रहा चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी कांग्रेस के एकमात्र सीएम एनडी तिवारी के अलावा किसी भी मुख्यमंत्री को अपना कार्यकाल पूरा करने का सौभाग्य नहीं मिला. इस मिथ को तोड़ते हुए पुष्कर सिंह धामी राज्य में बीजेपी के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं. 

विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी बनेंगे बीजेपी का चेहरा?
साल 2021 में जब पुष्कर सिंह धामी ने कमान संभाली थी, तब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर संशय और अस्थिरता का माहौल था. तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद अचानक सीएम बनाए गए युवा नेता धामी पर खुद पार्टी के भीतर भी सवाल उठे, लेकिन बीते चार सालों में सीएम धामी ने खुद को जनता और संगठन दोनों के भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित कर लिया है. अब 2027 विधान सभा चुनाव भी धामी के नेतृत्व में होगा ये बात पार्टी के कई बड़े नेता कह रहे है.

जब विधानसभा चुनाव हार गए थे पुष्कर सिंह धामी
बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी खुद खटीमा से चुनाव हार गए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाकर अपना भरोसा जताया. इसके बाद धामी ने चम्पावत उपचुनाव लड़ा और जीतकर धामी ने अपनी काबिलियत भी साबित की.

सीएम धामी ने लिए कई ऐतिहासिक फैसले
धामी सरकार ने कई साहसिक फैसले लिए, जो प्रदेश ही नहीं देश में चर्चा का विषय बने रहे जैसे समान नागरिक संहिता UCC को लागू करना. इसके अलावा महिलाओं के लिए तीन मुफ्त गैस सिलेंडर, सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण, सहकारी समितियों में 33% आरक्षण, और 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं ने महिलाओं को धामी के करीब किया.

पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के लिए सरकार ने अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख कर दी, वहीं शासकीय नौकरी में आवेदन की समय सीमा में भी लचीलापन दिया गया. 'उपनल' कर्मियों के लिए बीमा और अन्य सरकारी कर्मचारियों के समकक्ष सुविधाएं लागू कर, लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा किया गया.

पलायन रोकने के लिए रोजगार को दिया बढ़ावा
पलायन की समस्या से जूझ रहे पर्वतीय क्षेत्रों में ‘एप्पल मिशन’ और ‘कीवी मिशन’ जैसी योजनाएं लागू कर कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया गया है. 'हाउस ऑफ हिमालयाज' के ज़रिए स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने की कोशिश की जा रही है, इसके अलावा नकल विरोधी कानून, सख्त भू-कानून और लव-जिहाद, लैंड-जिहाद, थूक जिहाद जैसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर धामी ने कानून व्यवस्था के मसले पर भी मजबूत संदेश दिया है,

राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने के लिए भी सरकार ने ठोस प्रयास किए. राष्ट्रीय खेलों और G-20 बैठकों की मेज़बानी कर प्रदेश ने अपनी रणनीतिक और सांस्कृतिक ताकत का प्रदर्शन किया. नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखंड का देश में पहला स्थान आना, प्रशासनिक दक्षता और नीति निर्माण में हुई प्रगति का संकेत देता है.

23 हजार से अधिक सरकारी पदों पर सीधी भर्तियाँ, मानसखंड मंदिर माला मिशन, महासू मंदिर विकास परियोजना, और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे निर्णय धामी सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं. ‘ग्रॉस एनवायर्नमेंटल प्रोडक्ट’ GEP इंडेक्स में भी राज्य ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जो सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है.

सड़क, रेल और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विकास हुआ है. धामी स्वयं ज़मीनी स्तर पर जाकर योजनाओं की निगरानी करते हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति दोनों आई है. चार साल पहले जब पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने थे, तब वे केवल एक युवा चेहरा थे, लेकिन आज वह उत्तराखंड की राजनीति में सब से महत्वपूर्ण व्यक्ति बन चुके है धामी के समर्थक  उन्हें 'धाकड़ धामी' बोलते है. वहीं राज्य में धामी के सामने अब पंचायत चुनाव ओर फिर विधान सभा चुनाव है, इन दोनों चुनाव में अपनी योग्यता दिखानी होगी.

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