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Uttarakhand News: उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून लागू करेगी धामी सरकार, सीएम बोले- जल्द लिया जाएगा फैसला

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भू-कानून के लिए गठित समिति की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है. जल्द ही इस का अध्ययन कर रिपोर्ट को कैबिनेट में रखा जाएगा.

Uttarakhand News: उत्तराखंड में सशक्त भू कानून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में भू कानून लागू करने को सरकार पूरी तरह से तैयार है और इसके लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि जल्द ही बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के लिए जन भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है. मीडिया कर्मियों से औपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा भू-कानून के लिए गठित समिति की रिपोर्ट को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा. जनता की भावनाओं के अनुरुप सशक्त भू कानून राज्य में लागू करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है.

आखिर उत्तराखंड में क्या है भू कानून?

आजकल उत्तराखंड राज्य में भू-कानून की मांग जोरों से चल रही है, आइए हम आपको बताते हैं क्या है उत्तराखंड में भू कानून जिसकी की मांग चल रही है. इस भू कानून के क्या फायदे हैं और क्या नुकसान और क्यों उत्तराखंड के लोग इस कानून की मांग कर रहे हैं.

उत्तराखंड में इस बात की मांग चल रही है कि हिमाचल प्रदेश की तरह राज्य में भी भू कानून लागू करने की कवायद की जाए. इसी की तर्ज पर उत्तराखंड में भी यहां के लोग भू कानून की मांग कर रहे हैं. 1972 में हिमाचल प्रदेश में कानून बनाया गया. इस कानून के अंतर्गत दूसरे राज्यों के लोग हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं खरीद सकते थे. असल में उस समय हिमाचल आज की तरह संपन राज्य नहीं था, तो इस बात का डर था कि वहां के लोग मजबूरी में अपनी जमीन बाहर से आए लोगों को न बेच दें.

हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भू-कानून की मांग

तब हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर यशवंत सिंह परमार यह कानून लेकर आए कि राज्य से बाहर के लोग धारा 118 के तहत हिमाचल प्रदेश में कृषि भूमि नहीं खरीद सकते. इसके बाद 2007 में धूमल सरकार ने धारा 118 में संशोधन करते हुए उन बाहरी राज्यों के व्यक्तियों को जमीन खरीदने की इजाजत दी, जो इस राज्य में 15 साल से रह रहे हैं. इसके बाद आई सरकार ने इस 15 साल की अवधि को बदल कर 30 साल कर दिया यानी हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्य से आया कोई भी व्यक्ति जमीन नहीं ले सकता. इसी तरह उत्तराखंड में भू कानून की मांग उठ रही है.

निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खत्म किया भू कानून

ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड में पहली इस बार भू कानून की मांग हो रही है, इससे पूर्व भी भू कानून की मांग होती रही है. उत्तराखंड राज्य में पहली बार भू कानून 9 नवंबर 2000 को राज्य की स्थापना के बाद 2002 में एक प्रावधान किया गया था कि अन्य राज्य के लोग उत्तराखंड में सिर्फ 500 वर्ग मीटर तक जमीन खरीद सकते थे लेकिन बाद में 2007 में इसे घटाकर 250 वर्ग मीटर कर दिया गया. इसका मतलब यह था कि किसी अन्य राज्य के व्यक्ति को अगर उत्तराखंड में जमीन खरीदनी है तो वह अधिकतम 250 वर्ग मीटर कृषि जमीन ही खरीद सकता था.

लेकिन 6 अक्टूबर 2018 को उत्तराखंड सरकार एक नया अध्यादेश लेकर आई जिसके मुताबिक उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि सुधार अधिनियम 1950 में संशोधन का विधायक पारित किया गया. इसमें दो धाराएं 143 और धारा 154 जोड़ी गई. जिसके तहत पहाड़ों में भूमि खरीद की अधिकतम सीमा को ही समाप्त कर दिया गया. यह फैसला उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया था. जिससे यह हुआ की किसी भी अन्य राज्य का व्यक्ति उत्तराखंड में जितनी चाहे उतनी जमीन खरीद सकता था.

लोग कर रहे सशक्त भू कानून की मांग

ऐसे में उत्तराखंड के लोगों ने इसे उत्तराखंड की संस्कृति के साथ खिलवाड़ समझा, उत्तराखंड के लोग इस बात की चिंता करने लगे की बाहर के लोगों को जिस तरह से जमीन खरीदने की परमिशन दी गई है उससे उत्तराखंड की संस्कृति खतरे में पड़ सकती है. ऐसे में भू कानून की मांग की जाने लगी.

उत्तराखंड में अधिकतर होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट या अन्य उद्योग दूसरे राज्य के लोग चला रहे हैं. जिससे स्थानीय लोग अपनी जमीन बेचकर उन्हीं होटलों में नौकरी करते हैं. इससे उत्तराखंड की संस्कृति के साथ-साथ यहां की जमीन भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. उत्तराखंड के लोग इसे अपने साथ धोखे जैसा देख रहे हैं. इसलिए लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि उत्तराखंड में एक सशक्त भू कानून लाया जाए. जिससे स्थानीय लोगों की जमीन और उनकी संस्कृति भी बची रहे. 

फिलहाल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाया है कि जल्दी प्रदेश में एक सशक्त कानून लाया जाएगा जिससे उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं को ठेस ना पहुंचे. अगर उत्तराखंड में भू कानून आ जाता है तो बाहर के लोग इस राज्य में जमीन नहीं खरीद पाएंगे. जिससे यहां का सारा उद्योग क्षेत्र राज्य के लोगों के हाथ में आ जाएगा. जाहिर है अगर किसी संस्थान का मालिक राज्य का होगा तो वहां के कर्मी भी इसी राज्य के रखेगी, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

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