Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा को लेकर भक्तों में उत्साह, 10 दिनों में 6.17 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन
Chardham Yatra 2026 Registration: चारधाम यात्रा 2026 से पहले 6 लाख से ज्यादा पंजीकरण हुए. केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे. साथ ही फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर कड़ी रोक लगाई जाएगी.

उत्तराखंड की पावन धरती पर हर साल लाखों श्रद्धालुओं के कदम पड़ते हैं. केदारनाथ की ऊंची चोटियों से लेकर बद्रीनाथ के विशाल मंदिर तक, गंगोत्री की कलकल बहती धारा से लेकर यमुनोत्री के पवित्र कुंड तक. इस बार चारधाम यात्रा 2026 शुरू होने से पहले ही कुछ अलग संकेत दे रही है. जानकारी के अनुसार कपाट खुले नहीं, दर्शन हुए नहीं और पंजीकरण का आंकड़ा 6 लाख 17 हजार को पार कर चुका है. यह महज एक संख्या नहीं है, यह करोड़ों भारतीयों की आस्था की आवाज है.
कब से शुरू होगी यात्रा?
इस वर्ष चारों धामों के कपाट अप्रैल के तीसरे हफ्ते में खुलेंगे. यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर 19 अप्रैल को खुलेंगे. केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. बता दें कि 6 मार्च से 16 मार्च 2026 के बीच यानी केवल दस दिनों में रिकार्ड तोड़ पंजीकरण हुए हैं.
- केदारनाथ- 2,06,622
- बद्रीनाथ- 1,82,212
- गंगोत्री- 1,15,763
- यमुनोत्री- 1,13,256
कुल मिल कर 6,17,853 पंजीकरण और यह सिलसिला रुका नहीं है. श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि इस बार यात्रा काल में तीर्थयात्रियों की संख्या पिछले सभी वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है. जिस रफ्तार से पंजीकरण हो रहे हैं, वह अपने आप में असाधारण है.
शीतकाल में भी नहीं थमी भक्ति
धाम के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन भक्तों के मन में श्रद्धा कभी बंद नहीं होती. शीतकालीन यात्रा वर्ष 2025-26 में 16 मार्च तक 51 हजार से अधिक श्रद्धालु शीतकालीन पूजा स्थलों पर दर्शन कर चुके हैं.
भगवान बद्रीनाथ के शीतकालीन पूजा स्थलों योग बदरी पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में 20,054 भक्त पहुंचे. वहीं भगवान केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में दर्शनार्थियों की संख्या 31,736 रही. यह आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा सिर्फ एक मौसमी परंपरा नहीं, बल्कि साल भर जीवित रहने वाली आस्था है.
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पूरे जोश के साथ चल रहा बद्रीनाथ का पुनर्निर्माण- हेमंत द्विवेदी
बीकेटीसी ने यात्रा वर्ष 2026-27 के लिए 1,21,07,99,501 रुपये का बजट पारित किया है. इसमें से बद्रीनाथ धाम के लिए 57.47 करोड़ और केदारनाथ धाम के लिए 63.60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. हेमंत द्विवेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में केदारनाथ पुनर्निर्माण के बाद अब बद्रीनाथ का पुनर्निर्माण भी पूरे जोश के साथ चल रहा है.
फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगाई जाएगी कड़ी रोक
यात्रा 2026 पिछले वर्षों से कई मायनों में अलग होगी. समिति ने कुछ ऐसे निर्णय लिए हैं, जो चर्चा में हैं. गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव 10 मार्च को हुई बैठक में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है.
मोबाइल और फोटोग्राफी पर सख्त प्रतिबंध धाम परिसर में एक निश्चित दूरी तक मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित रहेगा. रील बनाना, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर कड़ी रोक लगाई जाएगी. समिति का तर्क है कि मंदिर परिसर की धार्मिक पवित्रता और शांत वातावरण बनाए रखना जरूरी है और स्क्रीन की चमक उस माहौल को भंग करती है.
तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष की स्थापना यह एक ऐतिहासिक कदम है. पुरोहितों के भविष्य और हितों की रक्षा के लिए 'तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष' बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ है. जो लोग दशकों से इन धामों की परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं, उनकी सुरक्षा की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल है.
ऋषिकेश में ट्रांजिट कैंप यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऋषिकेश में मंदिर समिति का एक शिविर कार्यालय खोला जाएगा. यहां से यात्रियों को मार्गदर्शन, जानकारी और जरूरी सहायता मिल सकेगी.
बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार मंदिर परिसर, दर्शन पंक्ति की रेलिंग, रंग-रोगन, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, स्वच्छता और विश्राम गृह सभी पर ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही ऑनलाइन पूजा बुकिंग और मंदिर समिति की वेबसाइट को भी अधिक सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जा रहा है.
आस्था का महाकुंभ बनने जा रही है लोगों की उम्मीद
हेमंत द्विवेदी ने साफ कहा है कि बीकेटीसी की एकमात्र प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना है. सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि तैयारियां कपाट खुलने से पहले पूरी तरह दुरुस्त हों और कोई कमी न रहे. जब 6 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यात्रा शुरू होने से पहले ही पंजीकरण करा चुके हों, तो व्यवस्था का चाक-चौबंद होना सिर्फ जिम्मेदारी नहीं एक अनिवार्यता है. इस बार चारधाम यात्रा सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों और आस्था का महाकुंभ बनने जा रही है.
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Source: IOCL

























