बस्ती में अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कार्यक्रम में विवाद, प्रशांत पांडेय सहित तीन पर FIR
Basti News In Hindi: राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में जगतगुरु अविमुक्तेश्वरानंद के सानिध्य में सनातन धर्म संवाद का भव्य आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम की कमान प्रशांत पांडेय संभाल रहे थे.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में आयोजित सनातन धर्म संवाद कार्यक्रम के पांच दिन बीत जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत पांडेय और दो अन्य के विरुद्ध कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. यह कार्रवाई कार्यक्रम में दिए गए भाषणों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित प्रयोग को लेकर की गई है.
बीते दिनों बस्ती जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में जगतगुरु अविमुक्तेश्वरानंद के सानिध्य में सनातन धर्म संवाद का भव्य आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम की कमान प्रशांत पांडेय संभाल रहे थे. आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं द्वारा दिए गए कुछ भाषणों की भाषा मर्यादित नहीं थी, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्यता फैलने की आशंका जताई गई.
महेश शुक्ला ने उठाए सवाल
मामले ने तब तूल पकड़ा जब उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला ने कार्यक्रम के दो दिन बाद एक प्रेस वार्ता के दौरान इस कार्यक्रम और इसके आयोजकों पर सवाल उठाए. उनके कड़े रुख के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और अंत में राजनैतिक दबाव में पुलिस ने कोतवाली थाना प्रभारी की तहरीर पर कानूनी शिकंजा कस दिया.
कोतवाली प्रभारी मोतीचंद के अनुसार, जिले में कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है. किसी भी व्यक्ति या संगठन को धर्म के नाम पर सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से विवेचना कर रही है और कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है.
भड़काऊ भाषण को लेकर एफआईआर
एफआईआर में तेज ध्वनि और भड़काऊ भाषण को आधार बनाया गया है. ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट हैं, जिनका पालन कराना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है. वहीं वैमनस्यता फैलाने वाले भाषण समाज में उस विष को घोलते हैं, जिसे साफ करने में दशकों लग जाते हैं. धर्म जोड़ने का माध्यम होना चाहिए, न कि दूरियां पैदा करने का.
निष्पक्ष जांच की मांग उठी
बस्ती की यह घटना एक सबक है. आयोजकों के लिए भी कि वे धर्म के नाम पर कानून और सामाजिक मर्यादा की लक्ष्मण रेखा न लांघें और प्रशासन के लिए भी कि कानून का राज बिना किसी दबाव या देरी के स्थापित होना चाहिए. फिलहाल आयोजक प्रशांत पांडे ने कहा है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या वास्तव में समाज को बांटने की कोशिश हुई या यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है.
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