बाराबंकी में लगातार बारिश से सरयू उफान पर, खतरे के निशान से ऊपर आते ही प्रशासन अलर्ट
Barabanki News In Hindi: नदी के उफान को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और एक्शन मोड में आ गया है. एक तरफ जहां प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में नेपाल से छोड़े गए पानी और लगातार हो रही बारिश के कारण सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाने से जिले की तीनों प्रमुख तटीय तहसीलों रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है.
नदी के उफान को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और एक्शन मोड में आ गया है. एक तरफ जहां प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ रामनगर क्षेत्र में करीब 200 नौनिहालों की पढ़ाई पर भी संकट छाया हुआ है, जिनका स्कूल पिछले साल आई भीषण बाढ़ के चलते नदी में समा गया था.
बाढ़ चौकियां एक्टिव की गयीं
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार पूरे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र पर पैनी नजर बनाए हुए है. तैयारियों की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि परसों रात और कल सुबह से सरयू नदी खतरे के निशान से थोड़ा ऊपर बह रही है. इसे लेकर प्रशासन सघन निगरानी रख रहा है और जिले की सभी बाढ़ चौकियां व राहत केंद्र एक्टिव कर दिए गए हैं.
कल वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रामसनेहीघाट क्षेत्र के प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया और लोगों को भरोसा दिलाया गया कि सरकार व प्रशासन उनके साथ खड़ा है। राहत सामग्री वितरण के लिए सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
ग्रामीणों में दहशत बरक़रार
प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच धरातल पर तराई क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंताएं बनी हुई हैं. रामनगर तहसील के बबुरी सरसंडा गांव में पिछले साल आई बाढ़ के दौरान प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय कटकर नदी में समा गए थे. एक साल बीत जाने के बाद भी नया स्कूल न बनने से करन मिश्रा और बीरू जैसे लगभग 200 बच्चे नियमित पढ़ाई से दूर हैं, क्योंकि दूसरे स्कूल की दूरी अधिक होने से रोज जाना संभव नहीं है. वहीं संभावित बाढ़ को देखते हुए ग्रामीण पुरानी नावों की मरम्मत कराने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारियों में जुट गए हैं.
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