प्रोफेसर, टीचर, NGO...बीजेपी सांसद ने बताया कौन हैं दिमागी नक्सली?
Dimagi Naxal Controversy: पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी संग्राम छिड़ गया है. जिस पर बीजेपी सांसद बृजलाल का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने बताया कि दिमागी नक्सल कौन होते हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भाषण देते हुए 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया जिसे लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी लगातार इस शब्द को लेकर विरोधियों पर हमलावर बनी हुई हैं. इसी बीच यूपी के पूर्व डीजीपी और बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि ये नक्सल बंदूक या गोली नहीं चलाते बल्कि दिमाग चलाकर युवाओं को हिंसात्मक बना रहे हैं.
BJP सांसद ने बताया कौन हैं दिमागी नक्सल
बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने 'दिमागी नक्सल' के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि "दिमागी नक्सली जंगलों बीहड़ो में नहीं रहते, ये हथियार लेकर नहीं चलते, ये गोलियां नहीं चलाते, ये सिर्फ और सिर्फ अपना दिमाग चलाते हैं. ये शहरों में प्रोफेसर के रूप में, अध्यापक के रूप में, NGO संचालक, कवि, बुद्धिजीवी, लेखक आदि रुपों में दिखाई पड़ते हैं.
बीजेपी नेता ने कहा कि ये लेख लिखते हैं, ये कांफ्रेंस करते हैं, सेमिनार करते हैं और वहां पर ये जनमानस खासतौर से युवाओं में ये अपनी हिंसात्मक विचारधारा भरते हैं. इसलिए ये नक्सली ये उन नक्सलियों से ज्यादा ख़तरनाक है जो जंगलों में रहते हैं जिनका करीब-करीब सफाया हो चुका है. ये हिंसक दिमागी नक्सली ये हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्यायपालिका, सुरक्षा बलों, संविधान आदि के विरुद्ध लोगों में अविश्वास की भावना पैदा करते हैं."
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बीजेपी नेता बृजलाल ने कहा कि ये युवाओं में भी घुसपैठ करते हैं और अपने दिमागी चालाकी से हिंसक गतिविधियों की तरफ़ मोड़ने का चालाकी से प्रयास करते हैं. इसलिए आज हमें इन दिमागी नक्सलियों से सावधान रहना है क्योंकि यही लोग है जो नक्सलियों का महिमामंडन करते हैं, उनके संबंध में लेख लिखते हैं और उनके लिए फंड जुटाते हैं. जिससे देश में अराजकता का वातावरण बन गया है.
पीएम मोदी के बयान पर सियासत तेज
बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा था कि देश ने हथियारबंद नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है लेकिन, अब दिमागी नक्सल मौजूद हैं. जो देश में हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाश रहे हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. जिसके बाद देश की सियासत में दिमागी नक्सल शब्द को लेकर बहस छिड़ गई है.
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