Barabanki News: बाराबंकी हादसे में पीड़िता के पास चेक संग फोटो पर घिरे BJP विधायक, तस्वीर वायरल
Barabanki News In Hindi: बाराबंकी के झांसा गांव में तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई. इस बीच बीजेपी विधायक के 5 लाख की सहायता राशि ने विवाद खड़ा कर दिया है.

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के फतेहपुर थाना क्षेत्र के झांसा गांव में शनिवार (23 मई) तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था. तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. हादसे में पिता नीरज और उनके तीन मासूम बच्चों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि गंभीर रूप से घायल पत्नी आरती को इलाज के लिए लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह अभी भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं.
पीड़िता को दिया 5 लाख का चेक बना विवाद
सोमवार (25 मई) को कुर्सी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा पीड़ित महिला का हालचाल जानने लोहिया अस्पताल पहुंचे. इस दौरान उन्होंने शासन की ओर से स्वीकृत 5 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा सहायता का प्रारूप चेक पीड़िता के बेड के पास कैमरों के सामने दिखाया. लेकिन अस्पताल से सामने आई यही तस्वीर अब सोशल मीडिया पर चर्चा और विवाद का कारण बन गई है.
वायरल तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पीड़ित महिला आरती अस्पताल के बेड पर बेसुध हालत में लेटी हुई हैं. वह अपने आसपास हो रही गतिविधियों से पूरी तरह अनजान नजर आई. इसी दौरान विधायक और अन्य लोग सहायता राशि का चेक हाथ में लेकर फोटो खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं. तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई.
कई लोगों ने इस तस्वीर को बेहद संवेदनशील मौके पर की गई औपचारिकता बताते हुए सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि जिस महिला ने एक ही हादसे में अपना पूरा परिवार खो दिया हो, उसकी ऐसी हालत में फोटो सेशन करना मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ दिखाई देता है. वहीं कुछ लोग इसे सरकारी सहायता की जानकारी सार्वजनिक करने और पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचने का संदेश देने की प्रक्रिया भी बता रहे हैं.
विधायक के समर्थकों ने क्या कहा?
समर्थकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि का काम सिर्फ संवेदना व्यक्त करना ही नहीं बल्कि सरकारी सहायता दिलाना भी होता है, इसलिए इस तरह की तस्वीरों को गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि विरोध करने वालों का कहना है कि मदद करना अलग बात है, लेकिन किसी बेसुध महिला के बेड के पास कैमरों के सामने चेक दिखाना संवेदनशीलता पर सवाल जरूर खड़े करता है. फिलहाल यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के बीच जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली, संवेदनशीलता और राजनीतिक औपचारिकताओं को लेकर एक नई बहस छेड़ गई है.
पासी समाज का है मलिहाबाद किला? मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का आया बयान
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL

























