'सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच', राम मंदिर ट्रस्ट पर बरसे सपा नेता पवन पांडे
Ram Mandir Donation Row: पूर्व विधायक ने प्रेस कांफ्रेस कर श्रीराममंदिर निर्माण ट्रस्ट पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने एसआईटी जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक एफआईआर क्यों नहीं हुई ?

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अब पूरी तरह से तूल पकड चुका है. बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार, जमीन खरीद में अनियमितता और मंदिर के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने की मांग की है.
सपा के पूर्व विधायक ने प्रेस कांफ्रेस कर इस मामले में श्रीराममंदिर निर्माण ट्रस्ट पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने एसआईटी जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक एफआईआर क्यों नहीं हुई ? बिना ट्रस्ट के संरक्षण के इतनी बड़ी लूट असंभव है.
अखिलेश यादव ने उठाया था मामला
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले राम मंदिर में चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने न्यायालय के भरोसे को भी आघात पहुंचाने का काम किया है.
ट्रस्ट को भंग करने की मांग
पूर्व मंत्री पवन पांडे ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए ट्रस्ट को भंग करे और अपनी निगरानी में न्यायिक जांच कराए. उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मंदिर में प्रवेश पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके.
जमीन खरीद-फरोख्त के आरोप
सपा नेता ने आरोप लगाया कि कई नजूल भूमि, मंदिरों और सार्वजनिक संपत्तियों को तीर्थ क्षेत्र में शामिल किया गया. उनका दावा है कि कम कीमत वाली जमीनों को कई गुना अधिक मूल्य पर खरीदा गया और कुछ ऐसी जमीनों का भी अधिग्रहण किया गया, जिनका क्रय-विक्रय नियमों के तहत संभव नहीं था.
पवन पांडे ने मंदिर से धन और आभूषण चोरी के मामलों में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि चोरी की घटनाएं हुई हैं, तो अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई.साथ ही उन्होंने एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए.
हालांकि, इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.जबकि शुरू में ट्रस्ट ने गबन या चोरी के आरोपों को नकारा है.

























