अंकिता भंडारी केस: पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को हाईकोर्ट से नहीं राहत, 10 अगस्त को अगली सुनवाई
Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने दोनों को अंतरिम जमानत देने से इनकार किया.

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. नैनीताल हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों को अपील लंबित रहने के दौरान अंतरिम जमानत देने या उनकी सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया. मामले में अगली सुनवाई अब 10 अगस्त 2026 को होगी.
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर की उन अपीलों पर सुनवाई कर रही है, जिनमें दोनों ने कोटद्वार की अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है. दोनों ने मुख्य अपील के निस्तारण तक जमानत पर रिहा किए जाने की मांग भी की है.
पीड़ित परिवार ने मांगी अपील की पूरी प्रति
सुनवाई के दौरान अंकिता भंडारी के परिवार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें दोषियों की ओर से दाखिल अपील की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी. इसके कारण पीड़ित पक्ष अपील में उठाए गए आधारों पर प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पा रहा था.
हाईकोर्ट के निर्देश पर दोषियों की अपील की प्रति पीड़ित परिवार के अधिवक्ता को उपलब्ध करा दी गई. अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए 10 अगस्त को सूचीबद्ध किया है.
बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें
इससे पहले हुई सुनवाई में दोषियों की ओर से तर्क दिया गया था कि अंकिता की मौत आत्महत्या से हुई और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है. इसी आधार पर दोनों ने सजा निलंबित कर जमानत देने की मांग की थी.
राज्य सरकार और पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य, अंकिता की व्हाट्सऐप चैट और घटनास्थल से जुड़े अन्य प्रमाण दोषियों को मामले से जोड़ते हैं. राज्य की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि घटना के बाद रिजॉर्ट के सीसीटीवी कैमरे बंद किए गए और डीवीआर से छेड़छाड़ कर साक्ष्य छिपाने की कोशिश की गई.
SIT ने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की
अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के बाद उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम ने दिसंबर 2022 में करीब 500 पन्नों की चार्जशीट कोटद्वार की अदालत में दाखिल की थी. इसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और करीब 30 दस्तावेजी साक्ष्य शामिल किए गए थे.
चार्जशीट में तीनों के खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने और यौन उत्पीड़न सहित विभिन्न धाराओं में आरोप लगाए गए थे. जांच के दौरान अंकिता की अपने मित्रों से हुई बातचीत और एक पूर्व रिसॉर्ट कर्मचारी के बयान को भी महत्वपूर्ण माना गया था.
जांच में यह आरोप सामने आया था कि अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले एक कथित ‘वीआईपी’ अतिथि को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया जा रहा था. अंकिता ने इस संबंध में अपने करीबी मित्र और रिजॉर्ट के एक पूर्व कर्मचारी को जानकारी दी थी.
हालांकि यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि 500 पन्नों की चार्जशीट और उसमें दर्ज करीब 100 गवाह SIT की जांच का हिस्सा थे. बाद में चले मुकदमे में अभियोजन ने 47 गवाहों को अदालत के सामने पेश किया, जिसके बाद निचली अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया.
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कोटद्वार कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने तीनों को हत्या, यौन उत्पीड़न और साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराधों में दोषी पाया था.
पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर ने इसी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने अभी उनकी मुख्य अपील पर अंतिम फैसला नहीं दिया है. फिलहाल केवल अपील लंबित रहने के दौरान जमानत और सजा निलंबित करने की मांग पर उन्हें राहत नहीं मिली है.
सितंबर 2022 में हुई थी अंकिता की हत्या
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं. सितंबर 2022 में वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं. बाद में उनका शव चीला शक्ति नहर से बरामद किया गया था.
अभियोजन के अनुसार रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता अंकिता को रिजॉर्ट से बाहर लेकर गए थे. रास्ते में विवाद के बाद उसे नहर में धक्का दे दिया गया. घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.
























