अमेठी में इंटरलॉकिंग में गड़बड़ी पर प्रधान बर्खास्त, 1.61 लाख की वसूली
अमेठी में इंटरलॉकिंग काम में अनियमितता की शिकायत पर डीएम ने बड़ी कार्रवाई की है. तत्कालीन ग्राम प्रधान को बर्खास्त कर डेढ़ लाख से अधिक की वसूली के निर्देश दिए हैं.

उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद अंतर्गत विकासखंड संग्रामपुर की ग्राम पंचायत ठेंगहा में इंटरलॉकिंग कार्य को लेकर की गई शिकायत के मामले में जिलाधिकारी संजय चौहान ने बड़ी कार्रवाई किया है. जांच में शासकीय धनराशि के उपयोग और कार्य के स्थान को लेकर अनियमितता सामने आने के बाद ग्राम पंचायत की निवर्तमान प्रधान/प्रशासक सुदामा देवी को पद से पदच्युत (बर्खास्त) करने का आदेश दिया है. साथ ही 3 लाख 22 हजार 396 रूपये की धनराशि में से आधी 1 लाख 61 हजार 198 रुपए की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने के निर्देश दिए हैं.
ग्राम पंचायत ठेंगहा के निवासी आशीष तिवारी, और अनिल पांडेय सहित अन्य ग्रामीणों की ओर से इंटरलॉकिंग कार्य में अनियमितता की शिकायत की गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचायत में प्रस्तावित स्थान पर इंटरलॉकिंग कराई बगैर धन का भुगतान हो गया है. यह इंटरलॉकिंग सिर्फ कागजों पर ही मौजूद है मौके पर नहीं है. इसके अलावा इंटरलॉकिंग की ईंटें उखाड़कर दूसरे स्थान पर ले जाने तथा इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई थी.
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3 लाख 22 हजार रूपये के कार्य की हुई जांच.
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी स्तर से मामले की जांच कराई गई. जांच में करीब 3 लाख 22 हजार 396 रूपये की लागत वाले इंटरलॉकिंग कार्य से संबंधित अभिलेखों, कार्यस्थल और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण की पड़ताल की गई. तत्कालीन प्रधान/प्रशासक सुदामा देवी से कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा गया. आदेश में कहा गया है कि ग्राम प्रधान की ओर से निर्धारित समय में अपेक्षित उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया.
खराब संपर्क मार्ग का दिया गया हवाला
जांच के दौरान तत्कालीन प्रधान की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि रामपाल के खेत से नरेंद्र की मशीन तक जाने वाला संपर्क मार्ग काफी खराब था. बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ हो जाने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती थी. ग्रामीणों की मांग पर ग्राम सभा की बैठक में इंटरलॉकिंग कराने का प्रस्ताव स्वीकृत किए जाने की बात कही गई. प्रधान की ओर से यह भी बताया गया कि कार्य की औपचारिकताएं पूरी कर वर्क आईडी बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वर्क आईडी तैयार नहीं हो सकी. मार्ग की स्थिति को देखते हुए कार्य कराया गया और बाद में भुगतान को लेकर समस्या सामने आई.
वर्क आईडी को लेकर सामने आई स्थिति
जांच में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पारसनाथ सिंह के खेत से नरेंद्र सिंह के घर तक की वर्क आईडी उपलब्ध होने की बात सामने आई. इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक में संबंधित इंटरलॉकिंग कार्य के भुगतान को उक्त वर्क आईडी के माध्यम से किए जाने का निर्णय लिए जाने का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है. हालांकि जिलाधिकारी के आदेश में प्रस्तावित स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर कार्य कराए जाने को शासकीय धनराशि के दुरुपयोग से संबंधित माना गया है.
मौके से इंटरलॉकिंग की ईंट गायब मिली
शिकायत में इंटरलॉकिंग की ईंटें गायब होने का आरोप भी लगाया गया था. जांच के दौरान बताया गया कि जिला पंचायत निधि से सीसी रोड का कार्य प्रस्तावित होने के बाद इंटरलॉकिंग की ईंटों को हटाए जाने की स्थिति बनी थी. मौके पर पहुंचकर ईंटों को अन्यत्र ले जाने से रोका गया और कुछ ईंटें वापस कर सुरक्षित रखी गईं थी लेकिन वह मौके पर नहीं मिली. रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ईंटों के गायब होने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज न कराने का आरोप परिलक्षित नहीं होता.
प्रधान के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई
जिलाधिकारी के आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों और जांच के आधार पर शासकीय धनराशि के दुरुपयोग तथा कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही के लिए सुदामा देवी को ग्राम प्रधान/प्रशासक पद से पदच्युत किया जाता है.
ग्राम विकास अधिकारी पर भी कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी संजय चौहान ने अपने आदेश में जिला विकास अधिकारी अमेठी को इस मामले में तत्कालीन और मौजूदा ग्राम विकास अधिकारी मिथिलेश कुमार यादव की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उनके विरुद्ध 1 लाख 61 हजार 198 रूपये की वसूली तथा विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराने को कहा है. संबंधित अधिकारियों को वसूली की राशि ग्राम पंचायत ठेंगहा के ग्राम निधि खाते में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.
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