शिक्षा सेवा अभिकरण को लखनऊ में खोले जाने का विरोध, हड़ताल पर गए वकील
यूपी के शिक्षा सेवा अभिकरण को लखनऊ में खोले जाने का हाईकोर्ट के वकील विरोध कर रहे हैं। हाईकोर्ट के वकील हड़ताल पर चले गए हैं।

प्रयागराज, मोहम्मद मोइन। यूपी के शिक्षा सेवा अभिकरण को प्रयागराज के बजाय लखनऊ में खोले जाने के प्रस्ताव का इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील जमकर विरोध कर रहे हैं। विरोध के चलते वकील एक बार हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार को वकीलों ने हाईकोर्ट के गेट के बाहर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना है कि यह प्रयागराज के खिलाफ बड़ी साजिश है। इससे पहले शिक्षा विभाग के सभी मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट आते थे, लेकिन अब यह पहले अभिकरण में जाएंगे और उसके बाद सिर्फ रिवीजन वाले मामले ही हाईकोर्ट आएंगे। अभिकरण लखनऊ में खुलने से उसके फैसलों के खिलाफ अपील सिर्फ लखनऊ बेंच में ही हो सकेगी। अभिकरण लखनऊ में खुलने से इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों के पास आने वाले वकीलों के मुकदमे बीस फीसदी तक कम हो जाएंगे।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय के मुताबिक अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वह बेमियादी हड़ताल पर जाने का फैसला ले सकते हैं। हाईकोर्ट बार का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलेगा। अगर वहां से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो वकील बेमियादी हड़ताल पर जाने का एलान कर देंगे।
बतादें कि पिछले 15 दिनों में यह तीसरा मौका है, जब हाईकोर्ट के वकील इस मुद्दे पर हड़ताल पर हैं। दूसरी तरफ लखनऊ के वकील प्रयागराज के वकीलों के विरोध में आज कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। 
क्या है शिक्षा सेवा अभिकरण? शिक्षा सेवा अभिकरण देश के सभी राज्यों में खोला जा रहा है। हर राज्य में शिक्षा से जुड़े किसी भी तरह के मुकदमों की पहली सुनवाई अब इन्ही अभिकरण यानी ट्रिब्यूनल्स में होगी। यहां से आए फैसलों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील में की जा सकेगी। हाईकोर्ट के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। यूपी में फिलहाल शिक्षा से जुड़े ज़्यादातर मामलों की सुनवाई सीधे हाईकोर्ट में होती है।
अनुमान के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाले मुकदमों में तकरीबन 15 फीसदी शिक्षा विभाग से जुड़े होते हैं। अगर यूपी का ट्रिब्यूनल लखनऊ में खुलता है तो उससे प्रयागराज के वकीलों को दोहरा नुकसान होगा। पहला यह कि हाईकोर्ट के वकीलों का काम कम हो जाएगा और दूसरा लखनऊ में ट्रिब्यूनल होने से वहां से आए फैसलों को तब हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में ही चुनौती दी जा सकेगी। लखनऊ बेंच जिन आठ जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है, उनमे खुद लखनऊ भी शामिल है।
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Source: IOCL
























