अलीगढ़: CMO ऑफिस में अस्पताल रजिस्ट्रेशन के नाम पर भ्रष्टाचार, डेढ़ लाख रिश्वत का आरोप
Aligarh News In Hindi: शिकायतकर्ता विनोद पाल सिंह के मुताबिक, गभाना स्थित मां दुर्गा हॉस्पिटल के दस्तावेजों में डॉ. उमेश कुमार बघेल को पूर्णकालिक चिकित्सक के तौर पर दर्शाया गया है.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में निजी अस्पतालों के पंजीकरण को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं. गभाना क्षेत्र स्थित मां दुर्गा हॉस्पिटल के संचालक विनोद पाल सिंह ने सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों पर डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेने और नियमों के विरुद्ध डॉक्टर के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अस्पताल का पंजीकरण कराने का आरोप लगाया है. यह मामला अस्पताल के नवीनीकरण (रिन्यूअल) के समय उजागर हुआ है.
आरोप है कि यह वही बाबू हैं जिसे भ्रष्टाचार के चलते पटल से हटा दिया गया था, लेकिन सीएमओ ने फिर उसे तैनाती देकर सवाल खड़े कर दिए थे. जिसके बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लग रहे हैं.
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एक डॉक्टर के नाम पर कई अस्पतालों में पूर्णकालिक दस्तावेज लगाने का आरोप
शिकायतकर्ता विनोद पाल सिंह के मुताबिक, गभाना स्थित मां दुर्गा हॉस्पिटल के दस्तावेजों में डॉ. उमेश कुमार बघेल को पूर्णकालिक चिकित्सक के तौर पर दर्शाया गया है. वहीं, आरोप है कि डॉ. बघेल स्वयं भी अन्य स्थानों पर अस्पताल संचालित करते हैं. शिकायत में कहा गया है कि क्वार्सी क्षेत्र में संचालित एक अस्पताल में डॉ. उमेश कुमार बघेल के दस्तावेज पूर्णकालिक रूप से लगे हुए हैं, जबकि छर्रा क्षेत्र में संचालित अस्पताल में भी वह ओपीडी में बैठते हैं.
ऐसे में सवाल यह है कि एक ही डॉक्टर के प्रमाणपत्र अलग-अलग अस्पतालों में किस आधार पर पूर्णकालिक चिकित्सक के रूप में लगाए गए और इन दस्तावेजों के आधार पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण किस स्तर पर स्वीकृत किया गया. इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग में निजी अस्पतालों के पंजीकरण की प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
डेढ़ लाख रुपये लेने का लगाया आरोप
मां दुर्गा हॉस्पिटल के संचालक विनोद पाल सिंह ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के पंजीकरण के लिए CMO कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों द्वारा उनसे करीब डेढ़ लाख रुपये लिए गए थे. उनका कहना है कि उन्हें बताया गया था कि अस्पताल की फाइल तैयार कर दी जाएगी और उन्हें ज्यादा भागदौड़ करने की आवश्यकता नहीं होगी. शिकायतकर्ता के अनुसार, उस समय उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस डॉक्टर के प्रमाणपत्र अस्पताल के पंजीकरण में लगाए जा रहे हैं, वही दस्तावेज अन्य अस्पतालों में भी पूर्णकालिक चिकित्सक के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
अब जब अस्पताल के रिन्यूअल का समय आया तो दस्तावेजों को लेकर आपत्ति सामने आने लगी. अस्पताल संचालक ने पूरे मामले की जांच कराकर यह पता लगाने की मांग की है कि आखिर किस अधिकारी या कर्मचारी ने इन दस्तावेजों को सत्यापित किया और किस आधार पर अस्पताल का पंजीकरण किया गया.
AD हेल्थ ने माना, एक से अधिक अस्पताल में पूर्णकालिक डॉक्टर का प्रावधान नहीं
मामले को लेकर जब अलीगढ़ के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. मोहन झा से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार कोई चिकित्सक एक ही अस्पताल में पूर्णकालिक तौर पर कार्य कर सकता है. किसी अन्य अस्पताल में चिकित्सक द्वारा कभी-कभार विजिट करने या ऑन-कॉल सेवा देने का प्रावधान हो सकता है, लेकिन एक ही डॉक्टर के दस्तावेजों को एक से अधिक अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक के तौर पर लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है.
उन्होंने कहा कि यदि किसी डॉक्टर के प्रमाणपत्र एक से अधिक निजी अस्पतालों में पूर्णकालिक रूप से लगाए गए हैं तो यह गंभीर विषय है. इस पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी. जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. AD हेल्थ के इस बयान के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर निगाहें टिकी हैं. जांच टीम यह भी देख सकती है कि संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और पंजीकरण की अनुमति किस अधिकारी ने दी.
जिलाधिकारी ने भी जांच और कार्रवाई की बात कही
मामले को लेकर अलीगढ़ के जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अस्पताल या सरकारी कार्यालय द्वारा अस्पताल के रजिस्ट्रेशन में अनियमितता बरती जा रही है तो उसकी नियमानुसार जांच कराई जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी. जिलाधिकारी के इस रुख के बाद अब यह मामला और गंभीर हो गया है. यदि जांच में रिश्वत लेने, फर्जी या नियम विरुद्ध दस्तावेजों के इस्तेमाल अथवा पंजीकरण प्रक्रिया में जानबूझकर अनियमितता बरतने की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों और अस्पताल संचालकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.
पहले भी बाबू पर लग चुके हैं गंभीर आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब अलीगढ़ के CMO कार्यालय में तैनात रहे कर्मचारियों पर निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगे हों. खबर के मुताबिक, CMO कार्यालय में बाबू के पद पर कार्यरत रहे रणधीर चौधरी पर इससे पहले भी रिश्वत लेकर निजी अस्पताल खुलवाने और अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाने जैसे आरोप लगाए गए थे.
इन आरोपों के बाद शासन स्तर से कार्रवाई किए जाने और उन्हें पद से हटाए जाने की बात सामने आई थी. हालांकि, अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि पद से हटाए जाने के बावजूद रणधीर चौधरी CMO कार्यालय में बाबू की कुर्सी पर बैठते हैं और अपना प्रभाव बनाए हुए हैं.
जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविकता
एक तरफ अस्पताल संचालक ने डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेने और डॉक्टर के दस्तावेजों के नियम विरुद्ध इस्तेमाल का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि एक डॉक्टर को एक से अधिक अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक के तौर पर दर्शाने की अनुमति नहीं है. ऐसे में अब जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है. मसलन, मां दुर्गा हॉस्पिटल के पंजीकरण के समय किन दस्तावेजों को आधार बनाया गया?
डॉक्टर के प्रमाणपत्रों का सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया? यदि वही डॉक्टर दूसरे अस्पताल में भी पूर्णकालिक रूप से पंजीकृत हैं तो दोनों अस्पतालों को पंजीकरण किस आधार पर मिला? और सबसे अहम सवाल यह कि अस्पताल संचालक द्वारा लगाए गए डेढ़ लाख रुपये रिश्वत के आरोप में कितनी सच्चाई है फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के बाबू पर गंभीर आरोप लगते हुए नजर आरहे है.
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