उपेन्द्र कुशवाह की पार्टी में टूट की आहट पर अखिलेश यादव का BJP पर तंज, जानें क्या कह दिया?
Lucknow News: अखिलेश यादव ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा, “भाजपा राज में ‘बाटी-चोखा’ भी नहीं केवल ‘माटी-धोखा’ खाने को मिलता है.”

बिहार में उपेन्द्र कुशवाह की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टूट की आहट से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने ही अंदाज में बीजेपी पर तंज कसा है. उन्होंने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है. दरअसल उपेन्द्र कुशवाह के आवास पर आयोजित ‘लिट्टी-चोखा’ पार्टी आयोजित की, जिसमें उनके तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह शामिल नहीं हुए. जबकि तीनों पटना में ही थे. यही नहीं तीनों ने दिल्ली में बीजेपी कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से से मुलाक़ात की.
माटी-धोखा खाने को मिलता है- अखिलेश यादव
इस पर अखिलेश यादव ने लिखा, “भाजपा राज में ‘बाटी-चोखा’ भी नहीं केवल ‘माटी-धोखा’ खाने को मिलता है.” उन्होंने आगे लिखा, “भाजपा किसी की सगी नहीं है. आज भाजपाई कहलाना एक नकारात्मक पहचान का पर्याय बन चुका है.” अखिलेश यादव ने कहा कि आज कोई भी स्वाभिमानी बीजेपी के साथ खड़ा नहीं होना चाहता.
भाजपा राज में ‘बाटी-चोखा’ भी नहीं केवल ‘माटी-धोखा’ खाने को मिलता है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 25, 2025
अब बात ‘हाता नहीं भाता’ से बहुत आगे निकल गयी है।
जब बात उपेक्षा से तिरस्कार तक पहुँच जाती है तो कोई भी समाज सह नहीं पाता है। ‘सत्ता’ अथवा ‘मान’, जब केवल ये ही दो विकल्प शेष रह जाते हैं तो स्वाभिमानी समाज…
भाजपा किसी की सगी नहीं है- सपा चीफ
सपा चीफ ने कहा, "जब बात उपेक्षा से तिरस्कार तक पहुंच जाती है तो कोई भी समाज सह नहीं पाता है. ‘सत्ता’ अथवा ‘मान’, जब केवल ये ही दो विकल्प शेष रह जाते हैं तो स्वाभिमानी समाज सदैव मान-सम्मान को ही चुनता है. ये बातें किसी एक समाज विशेष पर ही नहीं, हर समाज पर बराबर से लागू होती हैं. भाजपा किसी की सगी नहीं है. आज भाजपाई कहलाना एक नकारात्मक पहचान का पर्याय बन चुका है."
'भ्रष्टाचार के लिए किसी भी मर्यादा का उल्लंघन कर सकते हैं'
इसके आगे उन्होंने कहा, "आज भाजपाई की परिभाषा में वो लोग आते हैं जो अरावली की परिभाषा बदलकर अपने लालच के लिए पर्यावरण और आनेवाली पीढ़ियों को ठगना चाहते हैं. जो कुकृत्यों में दोष-सिद्ध, जेल में बंद अपराधियों को बेल पर छुड़ाकर उनका माल्यार्पण करते हैं. जो दवाइयों के नाम पर ज़हरीली-नशीली दवा बेचकर लोगों का जीवन ख़तरे में डालते हैं. कैमरे के सामने तक चुनाव लूट लेते हैं, पीठ पीछे की तो क्या ही कहिए. कहीं सीसीटीवी में अभद्रता के लिए क़ैद होकर भी आज़ाद घूमते हैं. ये वो लोग होते हैं जो भ्रष्टाचार के लिए किसी भी मर्यादा का उल्लंघन कर सकते हैं. ये बिना जांचे-परखे वैक्सीन को लगवाकर लोगों की जान के लिए ख़तरा बन जाते हैं. ये नफ़रती एजेंडा चलाकर सौहार्द और भाईचारा बिगाड़ते हैं. इकट्ठे होकर सरेआम लोगों को मार देते हैं."
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Source: IOCL





















