यूपी: राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारेंगे अखिलेश? बदलने वाला है समीकरण
राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की रणनीति ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है. अखिलेश यादव तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर 10वीं सीट के समीकरण बदलने की तैयारी में हैं.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस बार मुकाबला सिर्फ राज्यसभा की 10 सीटों का नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तस्वीर भी दिखाई दे रही है. संख्या बल के हिसाब से बीजेपी मजबूत स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने की स्थिति में है. ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की चर्चा ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के दफ्तर में राज्यसभा चुनाव को लेकर बैठकों और मंथन का दौर तेज रहा. शिवपाल सिंह यादव और प्रोफेसर राम गोपाल यादव की मौजूदगी में विधायकों से नामांकन पत्रों पर प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर कराए गए. बताया जा रहा है कि 4 नामांकन पत्र खरीदे गए हैं, हालांकि तीन नामांकन पत्रों पर प्रस्तावकों के हस्ताक्षर की तस्वीर सामने आई है. इससे साफ है कि सपा अपनी रणनीति को लेकर आखिरी वक्त तक कोई पत्ता खोलना नहीं चाहती.
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राम गोपाल यादव का नाम लगभग तय
राज्यसभा के लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव का नाम सपा की तरफ से तय माना जा रहा है. उनके नामांकन को लेकर पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखाई दे रही है. विधायकों का उनके नामांकन के लिए प्रस्तावक बनना भी इसी तरफ इशारा करता है.
लेकिन असली सवाल दूसरी सीट से आगे की रणनीति को लेकर है. सपा के पास मौजूदा संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट के लिए जरूरी समर्थन कम है. इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार को उतारने की चर्चा ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है.
तीसरे उम्मीदवार पर सबकी नजर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो वह चेहरा कौन होगा? चर्चा है कि अखिलेश यादव किसी चौंकाने वाले नाम के साथ सामने आ सकते हैं. यह चेहरा किसी बड़े उद्योगपति या मध्य उत्तर प्रदेश से जुड़े किसी प्रभावशाली नाम का हो सकता है.
हालांकि अभी इस नाम को लेकर तस्वीर साफ नहीं है. लेकिन अगर सपा संख्या बल से आगे जाकर चुनाव लड़ने का फैसला करती है, तो मुकाबला दिलचस्प होना तय है.
नजर राज्यसभा पर, निशाना 2027 पर?
दरअसल, इस पूरे चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है. राज्यसभा की एक सीट जीतना या हारना अपनी जगह है, लेकिन उससे बनने वाला राजनीतिक संदेश उससे कहीं बड़ा हो सकता है.
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सपा अगर अतिरिक्त सीट के लिए मैदान में उतरती है तो उसका मकसद सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच एक मजबूत राजनीतिक संदेश देना भी हो सकता है. यही वजह है कि यूपी की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव इस समय 2027 की बड़ी सियासी लड़ाई की छोटी सी झलक जैसा नजर आ रहा है.






















